धनतेरस पर असली धन क्या है? सोना, चांदी या स्वास्थ्य?
हर साल धनतेरस आते ही हमारे मन में एक ही सवाल आता है - इस बार क्या खरीदना है? सोना, चांदी, बर्तन, गाड़ी? बाजारों में भीड़, ऑफर और शॉपिंग की लिस्ट। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि धनतेरस शब्द का असली मतलब क्या है?
धनतेरस दो शब्दों से बना है - धन + तेरस। धन का मतलब होता है सम्पत्ति, लेकिन हमारे शास्त्रों में सबसे बड़ा धन स्वास्थ्य को कहा गया है। हमारे बुजुर्ग कहते आए हैं -
पहला सुख निरोगी काया।
और इसी दिन को( धन्वंतरि जयंती )के रूप में भी मनाया जाता है। कौन हैं भगवान धन्वंतरि? वही जो आयुर्वेद के जनक हैं, जिनके हाथ में अमृत कलश है। मतलब इस दिन ईश्वर ने हमें धन से पहले स्वास्थ्य का वरदान दिया था।
तो इस धनतेरस, चलिए एक नया संकल्प लेते हैं - इस बार सिर्फ तिजोरी नहीं, अपनी शरीर की तिजोरी यानी स्वास्थ्य को भी भरते हैं।
1. धन्वंतरि जयंती का रहस्य जो 90% लोग नहीं जानते
कहानी समुद्र मंथन की है। जब देवताओं और असुरों ने समुद्र का मंथन किया, तो 14 रत्न निकले। 14वें रत्न के रूप में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उनके प्रकट होने की तिथि थी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी - जिसे हम धनतेरस कहते हैं।
उनके एक हाथ में अमृत, दूसरे में आयुर्वेद ग्रंथ, तीसरे में जड़ी-बूटी और चौथे में शंख है। इसका संदेश साफ है - जीवन का असली अमृत पैसा नहीं, आरोग्य है।
आज हम धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं, लेकिन उससे पहले आरोग्य के देवता धन्वंतरि की पूजा का नियम है। क्योंकि अगर शरीर स्वस्थ नहीं है, तो लक्ष्मी का क्या लाभ?
2. आयुर्वेद के अनुसार धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?
हमारे दादा-दादी धनतेरस पर लोहा, पीतल, तांबा खरीदते थे। इसके पीछे विज्ञान है, अंधविश्वास नहीं।
क) तांबा:
आयुर्वेद में ताम्र जल को अमृत कहा गया है। रात भर तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह पीने से पेट साफ रहता है, इम्यूनिटी बढ़ती है और थायराइड कंट्रोल में रहता है। इस धनतेरस एक तांबे की बोतल या लोटा जरूर खरीदें।
ख) पीतल:
पीतल के बर्तन में खाना पकाने से 97% पोषक तत्व बने रहते हैं। नॉन-स्टिक से निकलने वाले केमिकल से भी बचाव होता है।
ग) लोहा:
लोहे की कढ़ाई में बनी सब्जी में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो महिलाओं में खून की कमी को दूर करती है।
इसलिए इस बार शोरूम वाले नॉन-स्टिक सेट की जगह, एक अच्छी पीतल की कढ़ाई या तांबे का जग खरीदें - ये 20 साल तक आपकी सेहत बनाएगा।
3. धनतेरस से दिवाली तक के 7 स्वास्थ्य नियम
त्योहार के नाम पर हम 10 दिन तक मैदा, चीनी, तेल में तले हुए पकवान खाते हैं। पेट खराब, एसिडिटी, वजन बढ़ना तो आम है। इससे बचने के लिए ये 7 नियम अपनाएं:
नियम 1: डीप क्लीनिंग = डीप ब्रीदिंग
घर की सफाई के साथ अपने फेफड़ों की भी सफाई करें। रोज सुबह 10 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी। जैसे घर से धूल निकलती है, वैसे शरीर से टॉक्सिन निकलेंगे।
नियम 2: मिठाई से पहले डिटॉक्स
दिवाली की मिठाई शुरू करने से 3 दिन पहले हल्का खाना खाएं। दिन में एक बार गुनगुने पानी में नींबू, जीरा पानी, या त्रिफला लें। लीवर को पहले से तैयार करें।
नियम 3: गुड़ है नई चीनी
बाजार की सफेद चीनी वाली मिठाई की जगह घर पर गुड़, खजूर, अंजीर से मिठाई बनाएं। गुड़ में आयरन होता है जो ठंड में शरीर को गर्म रखता है।
नियम 4: ड्राई फ्रूट्स को भिगो कर खाएं
धनतेरस पर सूखे मेवे खरीदना शुभ माना जाता है। लेकिन काजू-बादाम को सीधा तल कर खाने से वजन बढ़ता है। रात भर भिगो कर सुबह खाएं - पाचन आसान होगा और ताकत दुगनी।
नियम 5: नींद ही लक्ष्मी है
त्योहार की तैयारी में रात को 1-2 बजे तक जागना सेहत के लिए सबसे बड़ा नुकसान है। कोशिश करें 11 बजे तक सो जाएं। अच्छी नींद से ही चेहरे पर असली चमक आती है।
नियम 6: पैसे का तनाव - प्राणायाम से दूर
खर्चा बढ़ने से मन में टेंशन आना स्वाभाविक है। जब भी टेंशन लगे, 2 मिनट आंखें बंद करके दीर्घ श्वसन करें। श्वास ही जीवन है।
नियम 7: दान में सेहत बांटें
धनतेरस पर दान का बहुत महत्व है। इस बार कपड़ों के साथ किसी जरूरतमंद को एक योगा मैट, या एक महीने का आयुर्वेदिक काढ़ा, या एक हेल्दी रेसिपी की किताब दान करें। सेहत बांटने से बढ़ती है।
आखिर में एक संकल्प
इस धनतेरस हम सब कुछ खरीदेंगे, लेकिन एक चीज फ्री में मिलती है - *संकल्प*। आइए इस धनतेरस एक संकल्प लेते हैं कि हम रोज 20 मिनट अपने लिए निकालेंगे - 10 मिनट सांस के लिए, 10 मिनट अपने शरीर के लिए।
क्योंकि याद रखिए, तिजोरी भरी हो लेकिन तबीयत खराब हो तो उस तिजोरी का क्या फायदा?
अगर आपका शरीर स्वस्थ है, तो हर दिन धनतेरस है और हर रात दिवाली।
आप इस धनतेरस क्या खरीद रहे हैं? और आपका स्वास्थ्य संकल्प क्या है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं।
वेलनेस गाइड: अशोक सिंह सरुता |
स्वस्थ लाइफ - स्वस्थ सोच, स्वस्थ जीवन
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