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30 बिन्दुओं को सुबह सुबह उठकर करने से काफी फायदा होगा

 यहाँ 30 ऐसे आदतों और कार्यों की सूची दी जा रही है जिन्हें सुबह उठकर करने से दिनभर की ऊर्जा, मानसिक शांति और उत्पादकता में सुधार होता है:




  1. जल्दी उठना – सुबह जल्दी उठने से पूरे दिन की शुरुआत बेहतर होती है।
  2. पानी पीना – नींद से उठने के बाद पानी पीने से शरीर में ताजगी आती है।
  3. सकारात्मक विचार रखना – दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच से करें।
  4. योग या ध्यान – मानसिक शांति और ऊर्जा के लिए ध्यान या योग करें।
  5. व्यायाम – हलका व्यायाम शरीर को एक्टिव करता है और ऊर्जा का संचार करता है।
  6. प्राणायाम – श्वास पर ध्यान केंद्रित कर प्राणायाम करें, जिससे मानसिक शांति मिलती है।
  7. सूर्योदय का दृश्य देखना – सूर्योदय का आनंद लेने से मन प्रफुल्लित होता है।
  8. ताजगी के लिए स्नान – ताजगी के लिए हल्का स्नान करें।
  9. आभार व्यक्त करना – जीवन में जो अच्छा है, उसके लिए आभार व्यक्त करें।
  10. नाश्ता करना – पौष्टिक नाश्ता दिनभर के लिए ऊर्जा का स्रोत होता है।
  11. नेचर वॉक – बाहर जाकर ताजे हवा में कुछ देर चलें।
  12. संगीत सुनना – प्रेरणादायक या शांतिपूर्ण संगीत सुनकर मन को शांति मिलती है।
  13. किताबें पढ़ना – कुछ ज्ञानवर्धक किताबें या प्रेरणादायक लेख पढ़ें।
  14. प्राथमिकता तय करना – दिन की प्राथमिकताएँ तय करें।
  15. सपने तय करना – अपने बड़े लक्ष्यों और सपनों के बारे में सोचें।
  16. सकारात्मक संदेश लिखना – दिन के लिए प्रेरणादायक संदेश खुद को लिखें।
  17. स्वस्थ आदतें बनाना – अपने जीवन में स्वस्थ आदतों को लागू करना शुरू करें।
  18. कृतज्ञता पत्र लिखना – हर दिन के लिए कुछ के लिए आभार व्यक्त करें।
  19. स्मार्टफोन से दूरी बनाना – सुबह के पहले कुछ घंटों में स्मार्टफोन से दूरी बनाएं।
  20. ध्यान से सुनना – किसी से बात करते वक्त पूरी तरह ध्यान से सुनें।
  21. स्वच्छता बनाए रखना – घर या कार्यक्षेत्र को स्वच्छ रखें।
  22. शरीर को खिंचना – हलके स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करके शरीर को लचीला बनाएं।
  23. दीप प्राणायाम करना – गहरी श्वास लेना तनाव को कम करने में मदद करता है।
  24. मनोरंजन या हंसी – हंसी से दिन की शुरुआत करना अच्छा होता है।
  25. सृजनात्मकता का अभ्यास करना – कला, लेखन या संगीत जैसे सृजनात्मक कार्यों में हिस्सा लें।
  26. लक्ष्य लिखना – दिन के लक्ष्यों को लिखकर उन्हें हासिल करने की दिशा तय करें।
  27. विटामिन D लेना – सूर्य की रोशनी में कुछ समय बिताएं।
  28. स्वस्थ विचारों को प्रोत्साहित करना – खुद को सकारात्मक बातें याद दिलाएं।
  29. खुश रहना – खुद से और अपने काम से खुश रहें।
  30. सुबह की सैर पर जाना – बाहर घूमने से मन और शरीर दोनों को ताजगी मिलती है।


ताली बजाने के 20 फायदे क्या क्या है?

 ताली बजाने से कई स्वास्थ्य और मानसिक लाभ होते हैं। यहाँ ताली बजाने के 20 प्रमुख फायदे दिए गए हैं:



शारीरिक लाभ

  1. रक्त संचार में सुधार – ताली बजाने से हाथों की नसों को उत्तेजना मिलती है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है।
  2. हृदय स्वास्थ्य – यह हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
  3. मांसपेशियों को मजबूती – ताली बजाने से हाथों और कंधों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
  4. नसों की मजबूती – हथेलियों में कई एक्यूप्रेशर पॉइंट होते हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों की कार्यक्षमता को सुधारते हैं।
  5. इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना – यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे बीमारियों से बचाव होता है।
  6. डायबिटीज कंट्रोल – ताली बजाने से पैंक्रियास उत्तेजित होता है, जिससे इंसुलिन का स्तर संतुलित रहता है।
  7. श्वसन तंत्र में सुधार – इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने की प्रक्रिया बेहतर होती है।
  8. संधि (जोड़ों) का दर्द कम करना – गठिया और जोड़ों के दर्द में ताली बजाने से आराम मिलता है।
  9. मोटापा घटाने में मदद – ताली बजाने से कैलोरी बर्न होती है, जिससे वजन नियंत्रण में मदद मिलती है।
  10. त्वचा में निखार – बेहतर रक्त संचार से त्वचा में चमक आती है और झुर्रियाँ कम होती हैं।




मानसिक और भावनात्मक लाभ

  1. तनाव और अवसाद को कम करना – ताली बजाने से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होता है, जिससे मूड अच्छा होता है।
  2. एकाग्रता बढ़ाना – ताली बजाने से मस्तिष्क की कोशिकाएँ सक्रिय होती हैं, जिससे ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
  3. स्मरण शक्ति में वृद्धि – यह ब्रेन एक्टिविटी को बढ़ाकर याददाश्त तेज करता है।
  4. नींद में सुधार – ताली बजाने से दिमाग को शांति मिलती है और अनिद्रा की समस्या दूर होती है।
  5. बच्चों के मस्तिष्क विकास में सहायक – ताली बजाने से छोटे बच्चों के न्यूरोलॉजिकल विकास में मदद मिलती है।
  6. सकारात्मकता बढ़ाना – इससे मानसिक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मक सोच दूर होती है।
  7. आत्मविश्वास बढ़ाना – जब लोग समूह में ताली बजाते हैं, तो यह आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करता है।
  8. रचनात्मकता को प्रेरित करना – ताली बजाने से मस्तिष्क में रचनात्मकता बढ़ती है और नए विचार आते हैं।
  9. सामाजिक जुड़ाव बढ़ाना – सामूहिक रूप से ताली बजाने से लोगों में आपसी सहयोग की भावना बढ़ती है।
  10. धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ – पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन में ताली बजाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ताली बजाना एक आसान और प्रभावी व्यायाम है, जिसे कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रह सकते हैं। 

अपने ऊर्जा स्तर को बढ़ाने के लिए आप निम्नलिखित 20 सुझाव (How to boost energy lable every day)

 अपने ऊर्जा स्तर को बढ़ाने के लिए आप निम्नलिखित 20 सुझावों पर विचार कर सकते हैं:


  1. संतुलित आहार लें: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिजों से भरपूर आहार आपके शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।

  2. नियमित व्यायाम करें: रोज़ाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करने से शारीरिक और मानसिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

  3. पर्याप्त नींद लें: रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद लेने से शरीर की थकान दूर होती है और ऊर्जा स्तर बढ़ता है।

  4. हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम होती है।

  5. तनाव प्रबंधन करें: ध्यान, योग और गहरी साँस लेने की तकनीकों से तनाव कम करें, जिससे ऊर्जा में वृद्धि होती है।

  6. कैफीन का सीमित सेवन करें: अधिक कैफीन से अस्थायी ऊर्जा मिलती है, लेकिन बाद में थकान बढ़ सकती है।

  7. धूम्रपान और शराब से बचें: ये आदतें ऊर्जा स्तर को कम करती हैं और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

  8. नियमित भोजन करें: भोजन छोड़ने से ऊर्जा में कमी आती है; नियमित अंतराल पर स्वस्थ भोजन करें।

  9. फलों और सब्जियों का सेवन बढ़ाएं: ये प्राकृतिक शर्करा और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो ऊर्जा प्रदान करते हैं।

  10. पर्याप्त आयरन लें: आयरन की कमी से थकान होती है; पालक, दालें और नट्स का सेवन करें।

  11. ग्रीन टी पिएं: इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाते हैं और ऊर्जा प्रदान करते हैं।

  12. शुगर का सेवन कम करें: अधिक शर्करा से ऊर्जा में अचानक वृद्धि और फिर गिरावट होती है।

  13. ब्रेक लें: लंबे समय तक काम करने से बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें, जिससे मानसिक ताजगी बनी रहती है।

  14. सकारात्मक सोच अपनाएं: सकारात्मक दृष्टिकोण से मानसिक ऊर्जा बढ़ती है।

  15. संगीत सुनें: पसंदीदा संगीत सुनने से मूड बेहतर होता है और ऊर्जा मिलती है।

  16. ताज़ी हवा में समय बिताएं: प्रकृति में समय बिताने से मानसिक ताजगी और ऊर्जा मिलती है।

  17. विटामिन बी12 का सेवन करें: यह ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है; अंडे, डेयरी उत्पाद और फोर्टिफाइड अनाज खाएं।

  18. हल्का स्नैक लें: बादाम, फल या दही जैसे हल्के स्नैक्स ऊर्जा को बनाए रखते हैं।

  19. नियमित दिनचर्या बनाएं: नियमित सोने और जागने का समय निर्धारित करें, जिससे शरीर की आंतरिक घड़ी संतुलित रहती है।

  20. एक्यूप्रेशर पॉइंट्स का उपयोग करें: कुछ एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर दबाव देने से तुरंत ऊर्जा मिल सकती है।


रोज सुबह जल्दी उठने के 20 फायदे इस प्रकार हैं:

 रोज सुबह जल्दी उठने के 20 फायदे इस प्रकार हैं:




शारीरिक स्वास्थ्य लाभ

  1. बेहतर पाचन – जल्दी उठने से आपका मेटाबॉलिज्म तेज होता है और पाचन तंत्र अच्छा रहता है।
  2. वजन नियंत्रण – सुबह जल्दी उठकर एक्सरसाइज करने से वजन नियंत्रित रहता है।
  3. बेहतर इम्यून सिस्टम – ताजी हवा में योग और प्राणायाम करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  4. स्किन हेल्थ में सुधार – जल्दी उठने से आपकी त्वचा दमकती और हेल्दी रहती है।
  5. हृदय स्वास्थ्य में सुधार – सुबह जल्दी उठने से ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

मानसिक स्वास्थ्य लाभ

  1. तनाव कम होता है – सुबह का शांत वातावरण मन को शांति देता है और चिंता कम करता है।
  2. अच्छा मूड बना रहता है – जल्दी उठने वाले लोग ज्यादा खुश और एनर्जेटिक रहते हैं।
  3. बढ़िया मेमोरी – सुबह जल्दी उठने से दिमाग तेज होता है और याददाश्त अच्छी रहती है।
  4. आत्मविश्वास में बढ़ोतरी – एक अच्छी सुबह आपकी पूरी दिनचर्या को प्रभावी बनाती है।
  5. मानसिक स्पष्टता बढ़ती है – सुबह का समय दिमाग को ठंडा और केंद्रित रखने में मदद करता है।

आदतों और उत्पादकता में सुधार

  1. समय की बचत – जल्दी उठने से आपके पास पूरे दिन के लिए ज्यादा समय रहता है।
  2. बेहतर फोकस और कंसंट्रेशन – सुबह के समय ध्यान केंद्रित करने की क्षमता ज्यादा होती है।
  3. नए स्किल सीखने का समय मिलता है – आप एक्स्ट्रा समय में कोई नया कौशल सीख सकते हैं।
  4. डेडलाइन्स को आसानी से पूरा कर सकते हैं – सुबह काम करने से आपको बेहतर रिजल्ट मिलते हैं।
  5. आलस्य दूर होता है – सुबह जल्दी उठने वाले लोग ज्यादा सक्रिय रहते हैं।

सामाजिक और व्यक्तिगत विकास

  1. रिश्ते मजबूत होते हैं – जल्दी उठने से आप परिवार के साथ अधिक समय बिता सकते हैं।
  2. आध्यात्मिक विकास – मेडिटेशन और पूजा-पाठ करने का अच्छा समय मिलता है।
  3. प्रेरित महसूस करते हैं – सूर्योदय देखने और सकारात्मक दिनचर्या से प्रेरणा मिलती है।
  4. बेहतर लाइफ बैलेंस – जल्दी उठने से काम और निजी जीवन में संतुलन बना रहता है।
  5. नए अवसरों का लाभ मिलता है – जल्दी उठने वाले लोग ज्यादा अवसरों का फायदा उठा पाते हैं।

जल्दी उठने की आदत बनाकर आप अपने जीवन को स्वस्थ, सुखी और सफल बना सकते हैं! 


कसरत करने के 10 फायदे

 कसरत करने के 10 प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:



  1. वजन नियंत्रण: कसरत शरीर के कैलोरी खर्च को बढ़ाती है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

  2. हृदय स्वास्थ्य: नियमित कसरत हृदय को मजबूत बनाती है, रक्तचाप को नियंत्रित करती है और हृदय रोगों के जोखिम को कम करती है।

  3. मानसिक स्वास्थ्य में सुधार: कसरत तनाव, चिंता और अवसाद को कम करती है, और मूड को बेहतर बनाती है।

  4. मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती: व्यायाम से मांसपेशियों की ताकत और हड्डियों की घनत्व में वृद्धि होती है, जिससे हड्डियों की कमजोरियों (जैसे ऑस्टियोपोरोसिस) से बचाव होता है।

  5. ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है: नियमित कसरत शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाती है और थकान कम करती है, जिससे दिनभर सक्रिय रहने में मदद मिलती है।

  6. सहनशक्ति में वृद्धि: कसरत से सहनशक्ति में सुधार होता है, जिससे आप लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक काम कर सकते हैं।

  7. इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है: व्यायाम से शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, जिससे बीमारियों से बचाव होता है।

  8. बेहतर नींद: नियमित कसरत से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे गहरी और शांतिपूर्ण नींद मिलती है।

  9. लचीलापन और संतुलन में सुधार: कसरत शरीर को लचीला बनाती है और संतुलन को बेहतर करती है, जिससे गिरने का जोखिम कम होता है।

  10. स्वस्थ मस्तिष्क: व्यायाम मस्तिष्क में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और मानसिक फोकस और ताजगी में सुधार करता है।

ये सभी फायदे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, और जीवन में बेहतर गुणवत्ता लाने में मदद करते हैं।

हमारा दिमाग कैसे काम करता है सकारात्मक सोच से लाभ क्या है?

 हमारा दिमाग एक जटिल और अद्भुत अंग है, जो हमारे शरीर के सभी कार्यों को नियंत्रित करता है


 यह मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटा होता है: 


मस्तिष्क (Brain), मस्तिष्ककुञ्ज (Cerebellum), और तंतु मस्तिष्क (Spinal Cord)। दिमाग का कार्य सिग्नल्स और तंत्रिका तंतु (Nerve Cells) के माध्यम से होता है,

 जो पूरे शरीर में संदेश भेजते हैं।

  1. सोच और भावना: दिमाग की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सोचने, समझने, और निर्णय लेने में है। यह हमारी भावनाओं और यादों को भी नियंत्रित करता है। मस्तिष्क का वह हिस्सा, जिसे सेरेब्रम कहते हैं, हमारी सोच, समझ, यादें, और भावनाओं से जुड़ा होता है।

  2. संवेदनाएं: दिमाग हमारे पांचों इन्द्रियों (दृष्टि, श्रवण, गंध, स्वाद, और स्पर्श) से प्राप्त जानकारी को प्रोसेस करता है। यह हमें आसपास की दुनिया को समझने में मदद करता है।

  3. संचालन और नियंत्रण: दिमाग मांसपेशियों और अंगों को नियंत्रित करता है, जैसे शारीरिक गतिविधियां, संतुलन, और स्वचालित कार्य जैसे दिल की धड़कन और श्वसन।

  4. मेमोरी: दिमाग का एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य हमारी यादों को संग्रहित और पुनः प्राप्त करना है। यह लम्बे समय तक यादों को संजोकर रखता है और आवश्यकतानुसार उन्हें हमारे ध्यान में लाता है।

  5. तंत्रिका तंत्र: दिमाग और शरीर के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तंत्रिका तंत्र के जरिए होता है, जिसमें तंत्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन्स) शामिल होती हैं। ये न्यूरॉन्स विद्युत सिग्नल्स के माध्यम से एक दूसरे से बात करते हैं और शरीर के विभिन्न हिस्सों को निर्देशित करते हैं।

  सकारात्मक सोच जीवन में कई लाभ देती है। कुछ मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:


1. मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार

सकारात्मक सोच से तनाव कम होता है, जिससे चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है। यह शरीर के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है क्योंकि यह रक्तचाप, हृदय की गति और शरीर के अन्य कार्यों को स्थिर रखती है।


2. जीवन में बेहतर परिणाम

 जब आप सकारात्मक सोचते हैं, तो आप समस्याओं को अवसरों के रूप में देख पाते हैं और उनसे अच्छे परिणाम की उम्मीद रखते हैं, जो सफलता की संभावना बढ़ाता है।


3. संबंधों में सुधार

 सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति दूसरों के प्रति अच्छे दृष्टिकोण रखते हैं, जिससे उनके रिश्ते मजबूत होते हैं और वे लोगों के साथ अधिक सहायक और समझदारी से पेश आते हैं।


4. आत्मविश्वास में वृद्धि

सकारात्मक सोच आत्मविश्वास को बढ़ाती है। जब आप अपने आपको और अपनी क्षमताओं को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं, तो आप चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक प्रेरित होते हैं।


5. सकारात्मक ऊर्जा का संचार

सकारात्मक सोच से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो न केवल उनके अपने जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि दूसरों के जीवन में भी बदलाव ला सकती है। 


सकारात्मक सोच को अपनाना आपके जीवन को अधिक खुशहाल और संतुलित बना सकता है।


योग के कितने लाभ ? how many benefits of yogas.

 हम भारतीय योग के लाभों से परिचित हैं हम जानते हैं कि योग शरीर की ही नहीं, मन की मजबूती मैं भी मदद करता है लेकिन आधुनिक दुनिया में खासकर विदेश में योग की लोकप्रियता कमोबेश नई है। पिछले एक डेढ़ दशक से भी इस पर बकायदा शोध अध्ययन करते रहते हैं इस आधार पर एक निगाह डालते हैं योग के कुछ लाभों पर ..........


योग के कितने लाभ





योग से मिलता है लचीलापन

युग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संस्थान योग रिलायंस ने 2016 में योग की लोकप्रियता को समझते हुए इसका अभ्यास करने वालों के विच सर्वे किया। प्रतिभागियों को योग अपनाने का लक्ष्य बताना था। अधिकांश का उत्तर था लचीलापन बढ़ाने के लिए।

लचीलापन सेहत के लिए अहम है। बढ़ती उम्र में शरीर का जड़ होते जाना मुश्किल बढ़ता है और रोगों का कारण बनता है। योग करने वाले को इस मामले में बहुत राहत महसूस हुई। साबित हुआ कि योग बढ़ती उम्र में शरीर का लचीलापन दे सकता है।


योग देता है तनाव में राहत

अमेरिका के साइकोलॉजिकल एसोसिएशन ने बताया था कि 84 फ़ीसदी अमेरिकी किसी ने किसी तरह के तनाव का सामना करते ही हैं इसी के मद्देनजर, सर्वे के प्रतिभागियों ने बताया कि योग से तनाव में काफी हद तक राहत मिलती है। केवल शरीर को किसी मुद्रा में ले जाना नहीं है बल्कि इसमें स्वास विश्वास का अनुशासन भी होता है ध्वनि और ध्यान की भी यमन की सेहत के लिए मुफीद है।


योग मन को स्वस्थ रखता है

मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर या क्लिनिकल डिप्रैशन एक सामान्य मूड डिसऑर्डर है, जो किसी को भी हो सकता है 2017 में मन के रोगों की meta-analysis की गई जिसमें 23 के विचारों को रखा गया। इसमें स्वीकार किया गया कि इसके उपचार में योग दावा की तरह काम करता है। गति वाले योगासन हो या स्वास्थ संबंधी दोनों से इस डिसऑर्डर में लाभ होता देखा गया।


योग दिल की सेहत बेहतर बनाता है 

जनरल आफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन में 14 अध्ययनों को प्रकाशित किया, जिसमें प्राणायाम के फायदों का उल्लेख था। इसमें एकमात्र निष्कर्ष निकला कि प्रणब से शरीर के विभिन्न प्रणालियों पर सकारात्मक प्रभाव होता है। प्रणाम में शामिल सांस के नियंत्रण और श्वास विश्वास की बदलती गति के कारण धड़कन, धनिया के कार्य और हृदय के संग पंचम पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।


योग से पाश्चर सुधरता है


आधुनिक तकनीकी के सहारे रहने के कारण अधिकांश लोग दिनभर पीठ झुकाए काम करते हैं। हाल ही में 34 अध्ययनों के अवलोकन ने साबित किया कि योग करने वालों का बॉडी पाश्चर बहुत हद तक सुधर जाता है योगासनों में शामिल धीमी गति से शरीर को मोड़ने से मांसपेशियों में लचीलापन आता है इससे जड़ होने वाली मांसपेशियों का अच्छा समायोजन होने लगता है खास तौर पर मेरुदंड पर।


योग से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है


यह सिद्ध हो चुका है कि क्लीनिकल डिप्रेशन और एंग्जाइटी पर योग का उपचार जैसे प्रभाव होता है और तनाव अवसाद का सेहत पर बुरा असर पड़ता है जिसके चलते रोगों को आमंत्रण मिल जाता है। सिद्ध हो चुका है कि योग इन्फ्लेमेशन को दूर कर सकता है इसलिए ऐसे इन्फ्लेमेशन से जुड़े रोगों जैसे मधुमेह आदि में लाभदायक पाया गया है यह कुल मिलाकर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।


योग संतुलन को बेहतर बनाता है


एजेंसी फॉर हेल्थ केयर एंड क्वालिटी के मुताबिक बुजुर्गों में संतुलन खोने गिरकर चोटिल होने की घटनाएं बहुत बढ़ जाती है ऐसी छोटे घातक भी हो सकती है नए शोध बताते हैं कि बढ़ती उम्र के लोगों ने योगासन के चलते , संतुलन में सुधार होता है। संतुलन सुरक्षित करने के लिए ही नहीं उठने बैठने और काम करने के लिए भी बेहद अहम है। वृक्षासन का अभ्यास करने वाले एक पैर पर संतुलन बनाते हुए योग करते हैं। ऐसे कई आसन है जो संतुलन पर जोर देते हैं तभी तो दिमागी चोट वाले मरीज के लिए भी योग का सुझाव दिया जाता है।।।


करें योग 

           रहें निरोग।।


अच्छी नींद के लिए चमत्कार की उम्मीद ना करें यह नियम अपनाएं नींद बेहतर हो जाएगी

 सोने से पहले यह दिन तरीके आपकी नींद को बेहतर बनाने में कारगर हो जाएगी....


1.स्ट्रैचिंग की दो तकनीक है जो सबसे असरदार

बटरफ्लाई स्ट्रेस

अपने पैर के तलवे को एक साथ रखकर बैठे हैं घुटनों को गद्दे की ओर दबाये न। गहरी सांस 30 सेकंड से 1 मिनट लें और रोके रहें।

स्पाइनल ट्विस्ट

पीठ के बल लेट जाएं। सिरको विपरीत दिशा में मोड़ कर घुटनों को दूसरी तरफ करें। में स्ट्रेच इन दोनों दिशा में 30 सेकंड से 1 मिनट तक करें।

2. गर्म पानी से नहाना और किताबें पढ़ना भी अच्छा

सोने से पहले गर्म पानी से नहा सकते हैं। ऐसा करने से जोड़ों की नसों और दिमागी तनाव से आराम मिलता है। सोने से पहले अपने स्क्रीन टाइम को सीमित करते हैं। इससे आपके सोने और उठने का चक्र बना रहता है। मोबाइल डाटा बंद रखें जिससे आप आने वाले मैसेज ओं से दूर रह सकें। मोबाइल की जगह किताबें पढ़ हैं इससे आपके दिमाग को आराम मिलेगा। 1 महीने तक योग की इन तकनीकों को अपनाएं बदलाव का अनुभव आपको खुश कर देगा। रोज सुबह आप खुद को ताजा महसूस करेंगे और सोते वक्त भी करेंगे। 

3. प्राणायाम देता है श्वसन प्रणाली को आराम

प्राणायाम भी आपको अच्छी नींद लेने में मदद करता। योगेंद्र प्राणायाम करने से आपके डायफार्मा को आराम मिलता है जब आप सांस लेते हैं और छोड़ते हैं तब ड्राइव फ्रॉम सिकुड़ता है और फैलता है प्राणायाम से डायग्राम की कार्यप्रणाली सुधरती है इससे हमारा दिमाग तनाव  मुक्त होकर नींद के लिए तैयार हो जाता है।

कैसे करें :

पीठ के बल लेट कर अपने घुटनों और पैरों को ही उसके बल ले जाएं। फिर अपनी नाक के जरिए धीरे-धीरे सांस लेने के बाद 5:00 तक गिने और पेट को ऊपर की ओर बुला लें। फिर सांस छोड़ें और पांच तक गिनती हुए पेट को अंदर की ओर ले आए। अपनी सास को महसूस करें और ध्यान केंद्रित करते हुए 5 से 10 राउंड लगातार करें। यह प्राणायाम नींद ना आने की बीमारी के लिए एक असरदार तकनीक है।


एक घंटा सेहत के लिए बहुत जरूरी है

 आज की इस व्यस्त समय में अपना शारीरिक स्वास्थ्य और शारीरिक फिटनेस बना के रखना बहुत जरूरी है क्योंकि यदि आपका शरीर फिट नहीं है तो अनेक बीमारियों से लड़ने के लिए आपकी शारीरिक क्षमता है कम हो जाएंगी इसलिए आज की इस आर्टिकल में हम लोग देखेंगे एक घंटा ही सही सेहत के लिए क्यों इंपॉर्टेंट है यदि यह आर्टिकल आपको अच्छी लगती है तो आप स्टार या तो लाइक या हमें फॉलो जरूर करें।


एक घंटा 

सेहत के 

लिए........



किसी ने कहा है आपके स्वास्थ्य और बैंक के खाते एक जैसे होते हैं आप उनमें जितना डालते हैं उतना ही निकाल सकते है। अगर आप अपने स्वास्थ्य के लिए कुछ नहीं करेंगी तो स्वस्थ कैसे रहेंगे?


शादी के बाद मेरी पत्नी को कभी व्यायाम या पौष्टिक आहार की जरूरत महसूस नहीं हुई। बच्चे होने के बाद उनके पास खुद के लिए समय ही नहीं रहता था जब बीमारियां हुई। तब कहीं जाकर पत्नी के दिमाग की बत्ती जली है और उन्होंने संकल्प लिया कि हर दिन एक घंटा अपने शरीर के लिए निकालेंगे। तब से नियम पूर्वक  योग प्राणायाम करती हैं और पौष्टिक आहार लेती हैं।

यह मेरी पत्नी की ही नहीं ज्यादातर भारतीय महिलाओं की कहानी है। वह घर परिवार के कामकाज में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपने शरीर और स्वास्थ्य पर ध्यान देना भूल जाती हैं। वी घर परिवार के कामकाज में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपने शरीर और स्वस्थ पर ध्यान देना भूल जाती हैं वह सबका ध्यान रखती हैं बस अपना ही ध्यान नहीं रख पाती याद रखें, पहला सुख निरोगी काया। इसलिए 23 घंटे बाकी कामों के लिए एक घंटा अपने शरीर के लिए योग प्राणायाम व्यायाम आदि आवश्यक है।


डॉक्टर कनित कपूर ने कहा है...

हम बूढ़े होने के कारण व्यायाम नहीं छोड़ते हम बूढ़े ही इसलिए होते हैं क्योंकि हम व्यायाम छोड़ देते हैं।

शिल्पा शेट्टी सप्ताह में 5 दिन वर्कआउट करती है और 6 दिन डाइट प्लान पर चलती है इसी कारण वे 47 साल की उम्र में भी फिट दिखती हैं। यानी अगर अच्छा स्वास्थ्य और फिटनेस चाहिए तो व्यायाम और पौष्टिक आहार अनिवार्य है अपने शरीर की परवाह करना आपका कर्तव्य है क्योंकि यही अंत तक आपका साथ देगा।


प्रेरणा व प्रबंधक संबंधी जानकारी आज की इस आर्टिकल में सिर्फ हम लोगों ने शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर अध्ययन किया है यदि यह आर्टिकल्स आपको अच्छी लगती है तो आप भी इनका अनुसरण कर अपने जीवन को लंबी उम्र अपने शरीर को लंबी उम्र प्रदान कर सकते हैं और स्वस्थ मेंटेन कर सकते हैं।

क्या आपको भी मोबाइल की आदत लग चुकी है तो यह लाइन जरूर पढ़ें

 मोबाइल हमारी जरूरत है परंतु धीरे-धीरे फिर जरूरत लत बनती जा रही है यह किस तिथि के बाद यह लत नोमोफोबिया में बदल सकता है।


क्या आपको तो नहीं है नामो फोबिया?

हम मोबाइल के बिना नहीं रह सकते। अगर बैठे बैठे मोबाइल इधर-उधर हो जाए तो हम हड़बड़ा जाते हैं। लंबे समय तक मोबाइल नजर ना आए तो परेशान हो जाते हैं। और अगर दफ्तर या बाजार आते हुए मोबाइल घर पर ही छूट जाए अधूरापन महसूस होने लगता है।



मोबाइल की लत को नोमोफोबिया कहते हैं जिसका मतलब है नो मोबाइल फोबिया ,अर्थात मोबाइल ना होने का डर।

परंतु यह समस्या मानसिक विकार है या नहीं यह अभी तक सिद्ध नहीं हुआ है लेकिन यह मोबाइल लत के अंतर्गत आता है  जिससे पीड़ित के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है धीरे-धीरे इसका असर रिश्तो पर भी पड़ने लगता है।

रिपोर्ट बताती है कि भारत में चार में से तीन लोग नोमोफोबिया से कम या ज्यादा पीड़ित हैं। उनमें से कुछ ने माना कि उन्हें इंटरनेट खत्म होने, मोबाइल खोने, बैटरी खत्म होने आदि की वजह से भावनात्मक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है।



ऐसे पहचाने फोबिया के लक्षण  :

- जब व्यक्ति के पास उसका मोबाइल नहीं होता है और वह वह वह उसका इस्तेमाल नहीं कर पाता तो उसमें डर, चिंता और घबराहट की भावना पैदा होती है। वह मोबाइल इस्तेमाल नहीं कर पाता और इसके चलते चिंतित रहता है।

-ऐसे लोग मोबाइल स्विच ऑफ करने से भी कतराते हैं।

- लगातार मोबाइल जानते हैं कि कहीं कोई कॉल मैसेज या नोटिफिकेशन तो नहीं आया।

- जहां जाते हैं वहां मोबाइल साथ लेकर जाते हैं मोबाइल पास में ही है यह सुनिश्चित करने के लिए बार-बार जानते हैं।

- इंटरनेट काम ना करने पर उनकी व्यवहार में चिड़चिड़ा हट देखी जा सकती है।


खुद की मदद भी उपचार है

1.यदि आपको लगता है कि आप अपने मोबाइल फोन में अत्यधिक समय व्यतीत कर रहे हैं तो इस उपकरण के सही उपयोग पर ध्यान दे सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले मोबाइल को कुछ निर्धारित समय के लिए स्वयं से दूर रखने का निर्णय लेना उचित होगा।

2. अपनी दैनिक क्रिया की अवधि जैसे सोते भोजन बनाते या करते समय इसका उपयोग ना करें।

परिवारी क्या कार्य के समय में आवश्यकता पड़ने पर ही उसका उपयोग करें। इस प्रकार सीमित संतुलित एवं सही उपयोग से जो समय आप बचाएंगे उसे लोगों और परिवार के सदस्यों से बातचीत करने में उपयोग करें।

3. यदि आपका इस उपकरण की ओर अधिक ध्यान जाता है- तो इसे छोड़कर अन्य वास्तविक गतिविधियों में भाग लें जैसे कि सुबह शाम पर ले जाएं, गाना सुने या दोनों गतिविधि एक साथ करें। कुछ लोग मिलाकर एक संगोष्ठी मंच बनाए और किसी अच्छे विषय को लेकर प्रतिदिन विचार विमर्श करें। मोबाइल के बाजार लोगों से वास्तविक रूप में मिले-जुले।

4. मोबाइल के सारे नोटिफिकेशन चालू ना रखें। केवल काम के ही जारी रखें।


इसका उपचार भी होता है

नोमोफोबिया से पीड़ित व्यक्ति का उपचार मनोज चिकित्सा तथा मस्तिष्क पर प्रभाव डालने वाले दबाव दोनों से किया जा सकता है। इस समस्या के निदान के लिए संज्ञानात्मक व्यवहारवादी रोग उपचार प्रविधि अधिक प्रचलित है। इस प्रणाली के अंतर्गत मनोचिकित्सक रोगी के नकारात्मक और तर्क हीन विचार के रूप में का विश्लेषण करता है, जिससे उसका व्यवहार दुर्भावनापूर्ण या असामान्य हुआ है। 1 रोगी के सोचने के विभिन्न तरीकों की पहचान करता है और उसके स्थान पर उसे तर्कसंगत हुआ यथार्थवादी विचारों में परिवर्तित करने में सहायता करता है इसके अतिरिक्त चिकित्सक की सलाह लेकर अवसाद ग्रस्त रोगी चिंता और डर निरोधक दवाओं का भी प्रयोग कर सकते हैं।


सिगरेट में जितनी निकोटिन घटेगी उतनी मौत कम होगी

 द न्यूयॉर्क टाइम्स दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत अखबार में प्रकाशित हुआ है कि

  सिगरेट में जितनी निकोटिन की मात्रा घटेगी ,उतनी मौत कम होगी ।



अमेरिका में सिगरेट के असर से हर साल 4.8 लाख मौतें होती है। इसकी प्रमुख वजह निकोटिन की अधिक मात्रा है। अमेरिका और निकोटिन की का मात्रा वाली सिगरेट को ही बाजार में लाने की नीति बना रहा है। मई 2023 तक नई नीति लागू हो जाएगी। खास बात यह है कि सिगरेट में निकोटिन की मात्रा को 95% तक घटाने की प्रस्ताव तैयार किया गया है। अमेरिकी सरकार का मानना है कि ऐसा करने से सिगरेट से होने वाली मौत भी 95% घट सकती है।


रोज 30 मिनट भी कम होंगे तो भविष्य में गंभीर खतरा

कम नींद दिमाग को स्थाई नुकसान पहुंचा सकते हैं 
जर्नल ट्रेंड न्यूरोसाइंस में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार 1 सप्ताह तक भी कम नींद लेने से मस्तिष्क को गंभीर क्षति और न्यूरोडीजेनरेटिव कारों का खतरा बहुत अधिक होता है।अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना विवि में स्लीप साइंटिस्ट मैरी ऐलन विलेज के अनुसार नींद की कमी से मस्तिष्क के दो हिस्से लोकस  कोएर्यूलस और है तो हैपोकैम्पास प्रभावित होते हैं। पहला हिंसा अलर्टनेस और एक्साइटमेंट को नियंत्रित करता है जबकि दूसरा याददाश्त निर्माण और सीखने की क्षमता को नींद की कमी से एंटीऑक्सीडेंट का उत्पादन धीमा हो जाता है। एंटी ऑक्सीडेंट मस्तिष्क को अस्थाई अणुओं से बचाता है। जैसे कि इसका उत्पादन लगातार घटता है ये अंदर से मस्तिष्क पर हमला कर उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि कोशिकाओं को प्रतिदिन 30 मिनट अधिक देख देर तक जगाएंगे  तो वह मारने लगेंगे। अर्थात निर्धारित समय 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें।












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