Wikipedia

खोज नतीजे

Education लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Education लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

अंग्रेजी बोलने के 10 प्रमुख फायदे दिए गए हैं:

 आप लोग काफी दिनों से आर्टिकल मांग रहे थे। की अंग्रेजी बोलने के क्या फायदे हैं क्या हिंदी बोल करके मल्टीनेशनलकंपनियों मे हम काम नहीं कर सकते। क्या वहां अंग्रेजी बोलना जरूरी है।


यहाँ अंग्रेजी बोलने के 10 प्रमुख फायदे दिए गए हैं:


1. **वैश्विक संचार का माध्यम-

: अंग्रेजी एक अंतरराष्ट्रीय भाषा है। इसे दुनिया के अधिकांश देशों में समझा और बोला जाता है, जिससे अलग-अलग देशों के लोगों से बातचीत आसान हो जाती है।


2. **करियर के अवसर

ज्यादातर मल्टीनेशनल कंपनियों में अंग्रेजी ज़रूरी होती है। अंग्रेजी बोलना नौकरी पाने और प्रमोशन के मौके बढ़ा देता है।


3. **अच्छी शिक्षा तक पहुँच

दुनियाभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और ऑनलाइन कोर्सेस की भाषा अंग्रेजी होती है। अंग्रेजी आने से उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ते हैं।


4. **इंटरनेट का बेहतर उपयोग-

 इंटरनेट पर मौजूद 50% से ज्यादा कंटेंट अंग्रेजी में है। अंग्रेजी जानने से ज्यादा जानकारी तक पहुँचा जा सकता है।


5. **आत्मविश्वास में वृद्धि

: जब आप अंग्रेजी बोल सकते हैं, तो आप कई सामाजिक और पेशेवर परिस्थितियों में अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं।


6. **यात्रा में सहूलियत -

 विदेश यात्रा के दौरान अंग्रेजी जानना बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि यह टूरिज्म इंडस्ट्री की मुख्य भाषा है।


7. **व्यक्तित्व में निखार-

 अंग्रेजी बोलने से आपकी पर्सनैलिटी प्रोफेशनल और प्रभावशाली दिखती है, जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित होते हैं।


8. **अधिक जानकारी प्राप्त करना

 वैज्ञानिक शोध, टेक्नोलॉजी, बिज़नेस, हेल्थ आदि की अधिकतर जानकारी अंग्रेजी में उपलब्ध है। इससे ज्ञान का दायरा बढ़ता है।


9. **मनोरंजन की दुनिया तक पहुँच-

हॉलीवुड फिल्में, अंग्रेजी किताबें, गाने और वेब सीरीज़ को बिना सबटाइटल के समझा जा सकता है।


10. **नई भाषाएँ सीखने में मदद-

अंग्रेजी की व्याकरण और शब्दावली कई अन्य भाषाओं से मिलती-जुलती है, जिससे दूसरी विदेशी भाषाएँ सीखना आसान हो जाता है।


मुझे  आशा है कि यह आर्टिकल पढ़ कर आपको काफी जानकारियां प्राप्त हुई होगी। कमेंट करना बिल्कुल न भूलें।

अग्नि वीर को लेकर राहुल गांधी ने क्यों नरेंद्र मोदी पर प्रहार किया ?

राहुल गांधी ने लोकसभा की बैठक में जो कहा- उससे पूरे राजनीतिक पार्टियों में चर्चा का विषय बन गया है न केवल राजनीतिक पार्टी में बल्कि देश की जनता में भी काफी खलबली मची हुई है।

आज की इस आर्टिकल में राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा जो चर्चा का विषय बन गया और यह सियासी मुद्दा के रूप में डिबेट का विषय है ।उन्होंने आखिर लोकसभा की बैठक में पक्ष पार्टी को कौन सी वह मुख्य सवाल पूछ गई जो चर्चा का विषय है।


राहुल गांधी ने संसद में जो कहा उससे पूरे राजनीतिक पार्टी में चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने सांसद भवन में नेता प्रतिपक्ष के रूप में लगातार 2 घंटे तक पक्ष पार्टी से सवाल एक के बाद एक पूछते रहे। उन्होंने यहां तक की यह भी कहा कि जो हिंसा करते हैं वह हिंदू नहीं हो सकता और हिंदू कभी हिंसा नहीं कर सकता। यहां तक की लोकसभा भवन में सांसद की बैठक में उन्होंने शिवजी की तस्वीर और विभिन्न धर्मों के भगवान को उन्होंने प्रदर्शित चित्र के रूप में उदाहरण देते हुए पक्ष पार्टी को सवालों से घेरा उन्होंने शिव जी का उदाहरण देते हुए अभय मुद्रा और शिव जी के त्रिशूल और उनकी गले में जो सांप लटका हुआ है उसको परिभाषित करते हुए पक्ष पार्टी को कई सवालों से घेर लिया।जिससे आज न केवल राजनीतिक पार्टियों में बल्कि देश की जनता खासकर हिंदू समाज मुद्दे को लेकर रोड पर उतर आई है और यह चर्चा का विषय बन गया है ।सियासी मुद्दा छिड़ गई है पक्ष पार्टी का अपना तर्क है और विपक्ष अपने तौर पर आड़ी हुई है । रही धर्म को लेकर राहुल गांधी का कहना है पक्ष पार्टी से


डरो मत ,डराओ मत।।

इसका आशय  यह है कि पक्ष पार्टी अन्य पार्टियों को डराकर अपनी राजनीति करती है इसीलिए उन्होंने "डरो मत डराओ मत" का उदाहरण देते हुए शिव को अच्छी तरह से परिभाषित किया लेकिन लोगों ने इसे राजनीतिक मुद्दा ना समझ कर धार्मिक मुद्दा समझ कर सियासी कर रहे हैं। उन्होंने न केवल हिंदू धर्म की बात की बल्कि उन्होंने हिंदू मुस्लिम ,सिख ,इसाई सभी के भगवानों का चित्र प्रदर्शित करते हुए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि सभी धर्म में लिखा है 


डरो मत डराओ मत।


उन्होंने अग्नि वीर जैसी योजना को लेकर भी रक्षा मंत्री माननीय राजनाथ सिंह से बड़ी सवाल की।

जैसे कि आप सभी को पता है कि सरकार ने सशस्त्र बलों में सेवा देने के लिए भारतीय युवाओं के लिए 14 जून 2022 को अग्नि वीर जैसी योजना को लेकर आयी।

जिसमें सशस्त्र बल में जो भर्ती प्रक्रिया थी उसे पुरानी भर्ती पक्रिया को समाप्त कर नई भर्ती क्रिया के रूप में इस योजना को लाया गया जिसे अग्निपथ योजना का नाम दिया गया।


आखिर अग्निपथ योजना को लेकर सियासी मुद्दा क्यों?


अग्निपथ योजना को लेकर सियासी मुद्दा इसलिए क्योंकि अभी पिछले लोकसभा सांसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी भाषण में अग्निपथ जैसी योजना को लेकर कह गए बड़े सवाल माननीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से । उन्होंने कहा कि लुधियाना के अजय कुमार जो सुरंग बारूद विस्फोट जम्मू कश्मीर में शहीद हुए अर्थात वीरगति को प्राप्त हुए उन्हें सहायता राशि, पेंशन तथा शहिद की दर्जा भी उन्हें नहीं दिया गया। उनकाआरोप पक्ष पार्टी पर था जिसमें माननीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनकी इस सवाल का जवाब देते हुए कहा - कि आप लोगों को ,झूठ सवाल पूछ कर गुमराह ना करें ।

क्योंकि मुआवजा राशि वीरगति को प्राप्त अजय कुमार को दी जा चुकी है ।हम अग्नि वीर में कार्यरत सैनिकों को यदि वे वीरगति को प्राप्त होते हैं तो सरकार द्वारा मुआवजा के रूप में एक करोड़(1000000) राशि दी जाती है और शहिद अजय सिंह को कुछ राशि प्रदान कर दी गई है और कुछ राशि देने को बाकी है लेकिन राहुल गांधी का आरोप था कि उन्हें मुआवजा की राशि अभी तक नहीं मिली है।

सरकार की सभी कर्मचारी इस आरोप को लेकर छानबीन शुरू कर दिये है।

सूचना के अनुसार पाया गया कि शहिद अजय कुमार के पिता ने बया करते हुए बताया कि उन्हें कुछ राशि प्राप्त हो चुकी है और कुछ राशि अभी बाकी है।

आखिर क्या है अग्नि वीर योजना

अग्निवीर योजना

अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों की तीन सेवाओं में कमीशन अधिकारियों के पद से नीचे के सैनिकों की भर्ती के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक नई योजना है। इसकी घोषणा 16 जून 2022 को की गई। इस योजना के तहत सेना में शामिल होने वाले जवानों को 'अग्निवीर' के नाम से जाना जाएगा।

उम्र सीमा क्या है

यह योजना साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं को चार साल की अवधि के लिए भर्ती करने का प्रावधान करती है, जिसमें से 25 प्रतिशत को 15 वर्षों तक बनाए रखने का प्रावधान है. योजना के मुताबिक, 75 प्रतिशत अग्निवीर जो 4 साल में रिटायर होंगे हैं।



अग्नि वीर योजना में फॉर्म अप्लाई करने की योग्यता क्या है?

इस योजना में फॉर्म अप्लाई करने के लिए आपकी उम्र होनी चाहिए और अधिकतम 23 साल के लोग फॉर्म अप्लाई कर सकते हैं। अब रही बात डिग्री की तो आपके पास मिनिमम डिग्री 10वीं पास होनी चाहिए तथा आपका 45 फ़ीसदी अंक होनी चाहिए साथ ही साथ सभी सब्जेक्ट में आपका काम से कम 33 अंक होना अनिवार्य है।



इसमें कितने साल सेवा दे सकते हैं?

यदि आप इस अग्निपथ योजना के आधार पर चुने जाते हैं तो आपको सिर्फ 4 वर्ष की सेवा  प्रदान की जाएगी। इसके पश्चात आपका एग्जाम लिया जाएगा और जिसमें 25% सेनाओं को फिर से 15 वर्ष तक बनाए रखने के लिए चुना जाएगा।

इस योजना के मुताबिक 75% अग्नि वीर 4 साल में रिटायर हो जाएंगे।

Official website link (अग्निपथ)

Click here - online application apply 👈



यह आर्टिकल आप सभी को कैसी लगी इस तरह की आर्टिकल पढ़ने के लिए फॉलो करना ना भूले और कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें यदि यह आपके लिए सहायक रही हो तो।

🖕


सुमित्रानंदन पंत के अनुसार उनकी रचना भारत माता में प्रवासिनी किसको कहा गया है?

 आज की इस आर्टिकल में एक प्रकृति प्रेमी सुमित्रानंदन पंत के अनुसार 'भारत माता' में उन्होंने प्रवासिनी किसको कहा है उसके बारे में इस आर्टिकल में लिखा गया है जो नीचे दिए गए हैं।


प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत ने 'भारत माता' शीर्षक कविता में भारत माता के लिए ही प्रवासिनी शब्द का प्रयोग किया है। परतंत्र भारत माता अत्यंत दुखी है। इसकी पैरों में भेड़िया जकड़ी हुई है। 


उसकी संताने गुलामी जीवन जीने को विवश हैं। प्रगति और विकास के मार्ग से दूर भारत माता अपने ही घर में उदासीन अत्यंत दुखी हैं। अपने घर में रहने का कुछ भी सुख उसे नहीं मिल रहा है। वह पराए घर की निवासिनी की तरह विवश जीवन जीने को बाध्य है। यही कारण है कि कवि ने उसके लिए प्रवासिनी शब्द का प्रयोग किया है


भारत माता का सारांश अथवा आशय है कि ' भारत माता कविता में कवि सुमित्रानंदन पंत ने तत्कालीन परिस्थितियों में संघर्षरत भारतीय जीवन का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है। कवि कहते हैं कि खेतों में दूर तक फैली हुई हरियाली भारत माता का धूल भरा मैला सा आंचल है।

गंगा जमुना का बहता पानी, मिट्टी की प्रतिमा सी दुखी भारत माता अश्रु जल है। जो लगातार बह रही है भारत माता दीनता से पीड़ित अपलक आंखें झुकाए हुए, होठों पर शांत भाव से क्रंदन करते युगों की पराधीनता रूपी अंधकार से किन मां होकर मानव अपने ही घर में प्रवासिनी हो गई है।


कविता कालीन स्थिति को जिक्र करते हुए कहते हैं, कि भारत माता की 30 करोड़ संतान के पास तन ढकने को कपड़े तक नहीं है। वह भूखी प्यासी शोषण और असहाय जीवन जीने को विवश है। भारत को मुद्दत सभ्यता अशिक्षा और निर्धनता ने घेर रखा है। इससे मानव भारत माता मस्तक झुकाए वृक्ष के नीचे निवास कर रही है। 

धन धनिया से परिपूर्ण भारत माता धरती के समान सहनशील बनकर आज कुंठित सी है। उसके कांपते हुए अंधेरों की मौन हंसी राहुग्रसित चंद्रमा के समान दिखाई दे रही है।

कवि कहते हैं कि अंधकार से आप शादी क्षितिज में भारत माता की भुकुरट्टी चिंतित है। उसने अपने स्तनों से अमृत अतुल्य अहिंसा रूपी दूध का पैन कर कर भारतीय मनुष्य को पालन पोषण किया है।

इससे भारतीयों के मन से भय व अंधकार दूर हो गया।

इस प्रकार कविवर पंत ने अत्यंत भावपूर्ण शैली में सहज, सरल तथा प्रभावपूर्ण भाषा का प्रयोग करते हुए भारत माता के वास्तविक चित्रों को इस प्रकार कविता में अंकित किया है।


संघर्षों की सीप में ही सफलता का मोती पलता है

संघर्षों की सीप में ही सफलता का मोती पलता है -

 संघर्ष से व्यक्ति में निखार आता है। संघर्ष से प्राप्त लक्ष्य का मूल हर कोई नहीं समझ सकता। स्वाति नक्षत्र की एक बूंद शिप में बंद होकर ही मोती का रूप धारण कर पाती है। हमें जीवन में अनेक दृष्टांत ऐसे मिल जाएंगे की जिसने जीवन संघर्ष में अपने को झोंक दिया, सफलता ने निश्चित रूप से उसका कदम चूमा है।

जिसने संघर्ष से पलायन किया उसे कोई लक्ष्य या मुकाम हासिल नहीं हो सका। प्रत्यक्ष उदाहरण है - सोना आग में तपकर ही निखरता है।

जीवन में निखार के लिए भी संघर्ष आवश्यक है।



महत्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में रहता है-


सिपी के कठोर कवच के अंदर सुंदर मोती रहता है। निष्ठुर एवं क्रूर बनने पर ही ज्यादातर महत्वाकांक्षाएं पूरी होती है। सहृदयता एवं उदारता के साथ महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना संभव है।

व्यक्ति जब कठोरता और क्रूरता से प्रेरित रहता है, तब उसके पीछे उसकी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति का लक्ष्य होता है। महत्वाकांक्षाएं अत्यंत मोहन एवं आकर्षक होती है।

मनुष्य उसका मोह नहीं छोड़ पता। मोती की सुंदरता के आकर्षण में मनुष्य बंधें बिना नहीं रह पाता। अतः महत्त्वाकांक्षा  मोती की तुलना समिचीन है


क्षमा वीरों का आभूषण है-


वह व्यक्ति समाज में श्रेष्ठ और वीर माना जाता है जो दूसरों की गलती को नजर अंदाज करते हुए उसे क्षमा प्रदान करता है। भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल की गलतियों पर ध्यान न देते हुए उसे कहा था कि मैं तुम्हारी 100 गलतियों पर क्षमा करता रहूंगा और उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा निभाया भी।


विपत्तियां मनुष्य की सर्वश्रेष्ठ गुरु है


मनुष्य संभावित सुख पूर्ण स्थितियों की ओर आकर्षित होता है।

किंतु मनुष्य के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास विपत्तियों में ही होता है विपत्तियां मनुष्य को कर्मशील एवं कर्तव्य परायण बनती हैं। विपत्तियों से गिरा आदमी जीवन की दुरुह से  दुरुह स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहता है। जिसने जीवन में दुख नहीं देखा उसे जीवन के सच्चे स्वाद से वंचित मानिए। हमारे महापुरुषों का जीवन चरित्र इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने दर्द में विपत्तियों का सामना करके अंत में उन पर विजय प्राप्त की। विपत्तियों का सामना करके मनुष्य सहनशील हो जाता है। विपत्ति रूठी भट्टी में तपकर ही मनुष्य में सोने जैसा निखार आता है।

यह कैसे सिद्ध करोगे कि गांधी जी में सेवा भावना प्रबल थी


 इस आर्टिकल में हम गांधी जी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा करेंगे । जैसे कि   

आपने टाइटल में देखा ही लिया है कि 

यह कैसे सिद्ध करोगे कि गांधी जी में सेवा भावना प्रबल थी?

जैसे कि आप सभी को पता है गांधी जी हमारे राष्ट्रपिता के रूप में जाने जाते हैं और उनका राष्ट्रपिता कहलाने के पीछे क्या राज है?

 अगर उन सभी चीजों पर हम चर्चा करें तो आर्टिकल काफी लंबी हो जाएगी।

हम इस आर्टिकल में सिर्फ एक ही क्वेश्चन का डिटेल चर्चा देखेंगे

जब गांधी जी राजकोट में कुछ महीने वकालत के लिए ठहरे थे। इसके बाद जब उन्होंने राजकोट से वकालत करने की पहचात मुंबई आए तब वहां उनकी वकालत अच्छी चल रही थी। लेकिन वहां उन्होंने वकालत के साथ-साथ देखा कि यहां की जनता काफी अस्वस्थ के कारण बीमार हो रही है वे स्वास्थ्य को लेकर बहुत बेचैनी महसूस कर रहे थे ।और गांधी जी की यह मुख्य खास बात रही थी कि वह स्वस्थ के प्रति बहुत ही सजक थे।


जैसे कि आज हमारे भारत की सपना 

स्वच्छ भारत स्वच्छ मिशन 

यह गांधी जी का ही सपना था अगर हमारा भारत स्वच्छ रहेगी तो यहां की जनता स्वच्छ महसूस करेगी ।

यहां की जनता की स्वास्थ्य ठीक होगी ।और स्वास्थ्य का ठीक होना काफी जरूरी है।


वे मुंबई में वकालत करने के साथ-साथ लोगों का स्वास्थ्य का भी ख्याल रखते थे गांधी जी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पर विश्वास करते थे ।अफ्रीका में जब गांधी जी थे तब उन्होंने कई बीमारियों को अच्छा किया था और उन्हें प्राकृतिक चिकित्सा पर काफी विश्वास था।


एक बार की बात है जब उनका पुत्र मणिलाल विषम ज्वर से बीमार हो गया। निमोनिया की आशंका होने लगी। तब उन्होंने एक पारसी डॉक्टर को बुलाया, जिसने चिकित्सा के समय अंडा और मांस खाने का शोरबा देने की सलाह दी। जो कि गांधी जी के लिए असहज था । क्योंकि उनके परिवार में कोई अंडा और मांस को टच भी नहीं करता था। परंतु गांधी जी ने डॉक्टर की सलाह नहीं मानी। उन्होंने अपनी ही चिकित्सा से अर्थात जल चिकित्सा से मणिलाल को स्वस्थ कर दिया। चिकित्सा काल में भी परात्मा से प्रार्थना भी किया करते थे। जब मणिलाल स्वस्थ हो गया तो उन्होंने उसे कुंड मकान को छोड़कर खुला हवादार मकान लिया और उसमें रहने लगे मुंबई में उनकी वकालत जम ही रही थी कि दक्षिण अफ्रीका के मित्रों ने उन्हें पुणे अफ्रीका आने के लिए आग्रह किया ।क्योंकि उनकी जो सेवा की भावना थी अफ्रीका के लोग भी उनकी सेवा से काफी प्रभावित थे।


इस प्रकार से यह सिद्ध होता है कि गांधी जी में सेवा भावना प्रबल थी और आज हमारी भारत की संस्कृति भारत की जनता गांधी जी को स्वास्थ्य की सपना देखने वाले राष्ट्रपिता के रूप में पूजते हैं।


कोलकाता कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेकर गांधी जी को निराश क्यों हुई?


गांधी जी ने स्वदेश लौटते ही कोलकाता कांग्रेस में भाग लेने का निश्चय किया वह इस गाड़ी से रवाना हुए जिसमें कर फिरोज शाह मेहता और दिनशा  बाछा कांग्रेस अध्यक्ष यात्रा कर रहे थे।

गांधी जी चाहते थे कि कांग्रेस दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों की दुर्दशा पर कोई प्रस्ताव पास करें। कोलकाता पहुंचने पर भी लोकमान्य तिलक के साथ ठहराए गए। नेताजी नेता बनकर नहीं रहना चाहते थे वह कार्यकर्ता के रूप में कांग्रेस में भाग लेना चाहते थे इसलिए उन्होंने स्वागत समिति के अधिकारियों से कलर् की का काम ले लिया।

और निर्दिष्ट होकर कार्य करने लगे। उन्होंने स्वयं सेवकों से झाड़ू पूछा और पखाना साफ करने को कहा। स्वयंसेवक ऐसा विचित्र आदेश मानने के लिए तैयार नहीं हुई तब गांधी जी स्वयं सफाई के काम में जुट गए 


गांधी जी कहते नहीं थे बल्कि वह करते थे।

जब कांग्रेस का अधिवेशन प्रारंभ हुआ तब उन्होंने अपनी बात कहने के लिए अध्यक्ष से समय मांगा। अध्यक्ष ने केवल 5 मिनट दिए। इतनी कम समय में वे अफ्रीका के भारतीयों की समस्या पर पर्याप्त प्रकाश ना डाल सके। उन्हें बड़ी निराशा हुई कांग्रेस को उन्होंने एक निष्पादन संस्था के रूप में देखा उसमें अंग्रेजों और अंग्रेजी अर्थ का प्रभुत्व उन्हें अखाड़ा उन दिनों कांग्रेस का अधिवेशन प्रति वर्ष 3 दिनों तक होता था शेष 362 दिनों वह सोई रहती थी।


यह सभी देखकर कोलकाता कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेकर गांधी जी को बहुत निराशा हुई थी।


आज किस आर्टिकल में गांधी जी की जो सातवीं झलक के रूप में स्वदेश में गांधी जी क्या किया और उनकी क्या सपना थी इस आर्टिकल में उल्लेख किया गया है आने वाले नेक्स्ट आर्टिकल में नेक्स्ट टॉपिक पर आर्टिकल होगी फॉलो करें।

किसी भी राष्ट्र के संपूर्ण स्वरूप के लिए आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं

 आज के इस आर्टिकल में हम लोग देखेंगे कि किसी किसी भी राष्ट्र के संपूर्ण स्वरूप के लिए वह तत्व कौन-कौन से हैं जो बहुत ही जरूरी होती है तो आज की या आर्टिकल राष्ट्र निर्माण पर आधारित है और जैसे कि आप सभी को पता है हम देश के नागरिक राष्ट्र की वह कौन है जो देश की विकास में अपनी भागीदारी देते हैं तो हमें उन किन चीजों पर ध्यान देना है इन इस आर्टिकल के माध्यम से देखें।











विद्वानों के अनुसार राष्ट्र के तीन आवश्यक अंग माने गए हैं

1. भूमि ,

2.जन और 

3.संस्कृति

1. भूमि - राष्ट्र का यह अनिवार्य अंग है यही राष्ट्र का आधार है। देवताओं ने इसका निर्माण किया है। पृथ्वी और राष्ट्रीयता का परस्पर संबंध है। धरती की गोद में खेल कर ही मनुष्य अपना विकास करता है। उसके विविध पदार्थ का सेवन करता है। धरती से प्राप्त होने वाली वस्तुओं के प्रति उसकी आत्मीयता स्वाभाविक है। सभी मनुष्यों को राष्ट्र के भौतिक स्वरूप की जानकारी होना आवश्यक है। नदी ,पर्वत ,मैदान ,वायु , से आकाश आदि की सहायता से मनुष्य समृद्धशाली बनता है।

धरती माता अपनी संतानों का पालन पोषण करती है इसीलिए धरती पूजनीय है।

2. जन- यह राष्ट्र का दूसरा अंग है । बिना मनुष्य के राष्ट्र की कल्पना असंभव है। किसी भी जाति, भाषा और संस्कृति के लोग एक ही मन की संतान हैं। राष्ट्र की संपत्ति पर सबका समान अधिकार है। जैन के कारण ही पृथ्वी माता है और जन उसके पुत्र हैं।

"माता भूमि: पउत्रओद्म पृथिव्या:"

भूमि माता है मैं उसका पुत्र हूं यह सूत्र ही राष्ट्रीयता की भावना जागृत करता है।

3. संस्कृति - यह राष्ट्र का तीसरा अंग है तथा सबसे महत्वपूर्ण है। संस्कृति मनुष्य का मस्तिष्क है बिना संस्कृति के मनुष्य की कल्पना बिना धड़के शरीर जैसी है ।संस्कृत शब्द की उत्पत्ति संस्कार शब्द से हुई है ,जो मनुष्य जीवन को सभ्य जीवन को संस्कार प्रदान करे,

उसके जीवन को उत्तम बनाएं वही संस्कृति है। ज्ञान और कर्म दोनों के पारस्परिक प्रकाश को संस्कृत कहते हैं। समझ में और आपसी संहिता ही इसका मूल आधार होना चाहिए ।संस्कृत के विकास और अद्भुत से ही राष्ट्र आगे बढ़ता है।


आज के इस आर्टिकल में हमने राष्ट्र निर्माण के तीन महत्वपूर्ण अंगों का विस्तार से उल्लेख किया आने वाले आगे के आर्टिकल में हम इसी तरह के आर्टिकल का एक नई अंदाज लेकर लिखेंगे आप वेबसाइट को फॉलो करें और यह आर्टिकल कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर टाइप करें।


क्रोध अंधा होता है

 

आज की इस आर्टिकल में हम लोग क्रोध से संबंधित होने वाले नुकसान को देखेंगे जैसे कि आप सभी को पता है हम सभी के अंदर क्रोध होती है और हम इस क्रोध के साथ जीते हैं ऐसा प्रतीत होता है जैसे क्रोध हमारा दोस्त है लेकिन क्रोध करना सेहत के लिए हानिकारक होता है आप सभी को पता है

आपने एक बात सुनी होगी कि क्रोध अंधा होता है चलो इस बात को समझते हैं उसे व्याख्या करते हैं कि क्रोध क्या है क्यों अंधा होता है क्यों लोग इसे अंधा कहते हैं?




क्रोध एक उग्र मनोविकार है। क्रोध में वशीभूत होकर मनुष्य विवेक को देता है उसे उचित अनुचित का विचार नहीं रह जाता। क्योंकि मनुष्य परिणाम की भी चिंता नहीं करता। क्रोध के आवेग में वह अपना ही बुरा कर डालता है। क्रोध सदैव दुख का सर्जक होता है। क्रोधी को अपने देश दिखाई नहीं देते वह सदैव दूसरों के दोस्त देखा है यह शांति भंग करने वाला भाव है, इसलिए क्रोध को अंधा कहा गया है अंधे व्यक्ति को मार्ग से भटकने देर नहीं लगती इस प्रकार क्रोधित व्यक्ति को भी क्रोध के आगे में अनुचित राह पकड़ते देर नहीं लगती।


दुनिया की सबसे बड़ी सांप नॉर्थ ग्रीन एनाकोंडा का खोज हो गया है

 आज तक आपने कई बड़े सांपों का नाम सुना होगा लेकिन आज के इस आर्टिकल में आप एक विशेष सांप के बारे में पढ़ेंगे जिसकी खोज अभी हाल में ही की गई है जो एक चमत्कारिक सांप के रूप में देखा गया है आज से पहले इस प्रकार की सांप कभी नहीं देखी गई थी यह एक अद्भुत और एक अपने आप में रिकॉर्ड कायम करती है चलो आगे आर्टिकल में पढ़ते हैं




ब्राजील के नजदीक Amazon rainforest की जंगल में नॉर्थ ग्रीन एनाकोंडा (Northern green anaconda)पाया गया है जो freek vonk ने पानी के अंदर तैरते हुए इस सांप को देखा ।

और उसने बताया कि यह दुनिया की सबसे बड़ी सांप है आज से पहले इस प्रकार की सांप कभी नहीं देखी गई यह एक अपने आप में रिकॉर्ड है।

Mr. Will Smith प्रोफेसर ने बताया कि इस सांप की लंबाई करीब 26 फीट लंबी है अगर मीटर में कहें तो यह 9 मीटर लंबी है और यदि इस सांप की मोटाई की बात करें जिसे इंग्लिश में डायमीटर कहते हैं तो 12 inch अगर सेंटीमीटर में कहें तो 30.5 सेंटीमीटर ।







उन्होंने यह भी बताया कि उनके शरीर का जो सिर वाला पार्ट होता है उसका वजन मनुष्य के सिर की वजन के बराबर है और दूसरे एनाकोंडा से अगर कंपेयर करें तो उन्होंने बताया कि यह उन एनाकोंडा  ( anaconda) से 5.5 परसेंट अलग है अब आपके सुनके यह हैरानी होगी कि 5.5 परसेंट तो क्या होती है अगर मैं एक चीज बताऊं इसमें डिफरेंट की ,तो अगर मैं मनुष्य की बात करूं तो मनुष्य सिर्फ चिंपांजी से 2% ही अलग है तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि 5.5 परसेंट अलग होना कितना अलग हो सकता है यह अपने आप में एक अद्भुत  है।

वैज्ञानिकों के द्वारा खोजा गया रिकॉर्ड कायम करती है।



इस सांप की खोज में विल स्मिथ के टीम ग्रुप अमेजॉन रेनफॉरेस्ट में खोज के लिए गई थी जिन्होंने 10 दिनों तक अपना कार्य जारी रखा और अंतत उन्हें यह मिला।

और उन्होंने एक अद्भुत खोज की यह एनाकोंडा अजगर फैमिली से आता है और अभी यह दुनिया की सबसे बड़ी सांपों में गिना जाएगा।


 Northern green anaconda is greatest snake in the world which is founded by scientist free wonk and will Smith professor.

आज की इस आर्टिकल में इस अद्भुत सांप के बारे में लिखी आर्टिकल कैसे लगी कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और आगे   इसी प्रकार के आर्टिकल पढ़ने के लिए चैनल को फॉलो करें।

सुखवाद क्या है चार्वाक दर्शन के दो पक्ष निम्नलिखित कौन - कौन से हैं

 चार्वाक दर्शन में विषय को परम पुरुषार्थ माना गया है कामिनी के आगमन से होने वाला सुख नि:श्रेयस है।न नरक, मृत्यु के बाद अस्तित्व रखने वाला और अन्य शरीर धारण करने वाला कोई नित्य आत्मा नहीं है।

इसके संदर्भ में महत्वपूर्ण श्लोक -

1."यआवज्जईवएत् सुख न जीवेत"

अर्थ - जब तक जीवन है तब तक सुख खूब खाओ - पियो ।

2. " ऋणं कृत्वा घृतं पइबएत्"

अर्थ - सुख भोग करो चाहे ऋण ही क्यों ना लेना पड़े।

3." भस्मीभूतस्य देहस्य  पउनरआगमनं कुछ:"

अर्थ - शरीर के भस्म होने के बाद आत्मा कहां से आएगा इसलिए जीवन में जितना सुख ले सको उतना लो।द

चार्वाक दर्शन के दो पक्ष निम्नलिखित हैं -

1. स्वीकारात्मक पक्ष

2. अस्वीकारात्मक पक्ष

1. स्वीकारात्मक पक्ष

A. काम को सर्वोच्च सुख मानता है और अर्थ को उसका माध्यम।

B. काम ( सांसारिक सुख )अर्थ (घर संसार की प्राप्ति) इह लौकिक है निकृष्ट है स्वार्थ वादी सुखवादी दर्शन है।

2.अस्वीकारात्मक पक्ष

A. धर्म और मोक्ष को अस्वीकार।

B. पूर्ण जन्म और पूर्व जन्म का खंडन।

(नोट: -कालांतर मैं कुछ सुशिक्षित अर्थ वी काम के साथ धर्म को भी स्वीकार किया)

सुखवाद से संबंधित अन्य जानकारियां

# चार्वाक दर्शन  नीतीश शास्त्रीय विचार उनके ज्ञान मीमांसा व तत्व मीमांसा तत्वों की तार्किक परिणति है।


# नीतीश शास्त्रीय दृष्टिकोण से चार्वाक इहलौकिक ने कृष्ण स्वार्थ वादी सुख का समर्थन करते हैं।


# इसका आशय है कि वह जिस जीवन में अपनी शारीरिक सुख को जीवन का चरम लक्ष्य मानते हैं जो कर्म इस लक्ष्य प्राप्ति में सहायक  है वह उचित है और जो इसमें बाधक है वह अनुचित है।


# चार्वाक भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में स्वीकार्य चार पुरुषार्थों( धर्म ,अर्थ ,काम, मोक्ष )में से केवल अर्थ और काम को ही स्वीकार करते हैं उनके अनुसार काम शारीरिक सुख जीवन का चरम सुख है और अर्थ ( धन )इसकी प्राप्ति का साधन है।


# सुखवाद के संदर्भ में चार्वाक के दो संप्रदाय दिखाई देती है

ध्रुत चार्वाक

धार्मिक या शिक्षित चार्वाक।

ध्रुत चार्वाक व्यक्तिगत इंद्रिय सुख को ही मानते हैं जबकि शिक्षित चार्वाक  इंद्रियों सुख के साथ मूल्य की भी बात करते हैं।

आलोचना - 

 1.चार्वाक के नीति विचारों में जीवन की उच्च आदर्शो व मूल्यों को महत्व एवं स्थान नहीं दिया गया है यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने ही सुख प्राप्ति का प्रयास करें तो सामाजिक व्यवस्था खतरे में पढ़ सकती है।

2. चार्वाक मत भौतिकवाद को बढ़ावा देता है इससे उपभोक्तावादी प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है यह उपयोगितावाद (वस्तुओं का उपयोग आवश्यकता तक करना फिर उसे छोड़ देना) को बढ़ावा देता है।

3. पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इसे अनुकूल नहीं माना जा सकता।

4. ध्रुत चार्वाक सुख में गुणात्मक भेद नहीं मानते वे शारीरिक सुखों को ही प्रधान मानता है।


शंकराचार्य द्वारा चार्वाक सिद्धांतों का खंडन -

शंकराचार्य ने चार्वाक सिद्धांतों को विभिन्न बिंदुओं के आधार पर उसका खंडन किया है यह बिंदु निम्नलिखित हैं -


1. कभी-कभी शरीर की सट्टा रहने पर भी चैतन्य की सट्टा नहीं रहती। सुषुप्ति और मूर्च्छा की अवस्थाओं में चैतन्य नहीं रहता इसलिए चैतन्य को शरीर से भिन्न किसी द्रव्य अर्थात आत्मा का गुण मानना पड़ेगा।

2. रूप शरीर का गुण है क्योंकि यह शरीर में सब को ही दिखाई पड़ता है लेकिन चैतन्य केवल व्यक्ति को ही दिखाई पड़ता है इसलिए यह उसका व्यक्तिगत गुण है यदि चैतन्य शरीर का गुण होता तो उसे सभी देख सकते अतः चैतन्य शरीर का नहीं बल्कि शरीर से भिन्न आत्म का गुण है।

3. यह निश्चय के साथ नहीं कहा जा सकता कि चैतन्य भौतिक देह की स्थिति कल तक ही बना रहता है संभव है कि  देह‌ के नाश के बाद भी किसी रूप में उसका अस्तित्व बना रहे।

इस संशय मात्र से चार्वाक का यह सिद्धांत प्रसिद्ध हो जाता है कि चैतन्य देह का गुण है।

चैतन्य आत्मा के गुण के रूप में भी कायम रह सकता है जो कि शरीर की मृत्यु के बाद भी रहता है और दूसरे शरीर में जन्म लेता है इस परिकल्पना को अनुचित नहीं माना जा सकता।

4. चैतन्य का स्वरूप क्या है?

चार्वाक मत के अनुसार चैतन्य जड़ भूतों के संघात का विकार है तो, क्या चैतन्य उनसे बिन पदार्थ है? या भूतों का गुण है? अब भौतिक पदार्थ की सत्ता तो चार्वाक मानते नहीं इसलिए चैतन्य अभौतिक पदार्थ नहीं हो सकता। भूतों के संघात का धर्म भी चैतन्य को नहीं माना जा सकता, क्योंकि भौतिक पदार्थ और उनके धर्म चैतन्य के विषय हैं अर्थात चैतन्य उनका ज्ञाता है अतः चैतन्य का अपने विषयों से अभेद नहीं हो सकता।


 जैसे - आंख स्वयं को जला नहीं सकती वैसे ही विषय स्वयं अपने को नहीं जान सकता इसलिए चैतन्य कदापि अपने ही विषयों का धर्म नहीं माना जा सकता। जिस प्रकार चार्वाक भौतिक वस्तुओं की प्रत्यक्ष के आधार पर सत्ता स्वीकार करते हैं। इस प्रकार प्रत्यक्ष के आधार पर चैतन्य नमक स्वतंत्र वस्तु की भी सत्ता माननी चाहिए क्योंकि चैतन्य ब्राह्मण वस्तुओं और मनोवृत्तियों का प्रत्यक्ष करता है।

5. प्रकाश के बिना वस्तुओं का चाक्षुष प्रत्यय नहीं हो सकता लेकिन इसका अर्थ यह नहीं की चाक्षुष प्रत्यक्ष प्रकाश का गुण है प्रकाश तो चाक्षुष प्रत्यक्ष का एक उपकरण मात्र है। इसी प्रकार शरीर भी वस्तुओं का ज्ञान करने में चैतन्य का एक सहायक उपकरण हो सकता है अतः चैतन्य का शरीर का धर्म नहीं माना जा सकता और आत्मा चैतन्य विशिष्ट देह मात्रा नहीं है


चार्वाक दर्शन की प्रासंगिकता

1. चार्वाक ने कल्पना लोक से आम जनता का ध्यान हटाकर इस जग में सक्रिय होने की बात कही है।

2. लोक संदर्भ में प्रचलित जब तक सांस तब तक आज जान है तो जान है इत्यादि वाक्य भी एक संदर्भ में चार्वाक के मत का समर्थन करते हैं।

3.चार्वाक दर्शन भाग्यवादी और कल्पना वादी होने से बचाता है।


मॉडल प्रश्न जो परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाती हैं


1.  चार्वाक के भौतिकवादी सुखवाद का क्या महत्व है?

2. चार्वाक कितने प्रकार के प्रत्यक्ष प्रमाणों को स्वीकार करते हैं?

3. चार्वाक की तत्व मीमांसा प्रासंगिक है क्यों?

4.चार्वाक के सुखवादी सिद्धांत की विवेचना करें?

5. चार्वाक कृत अनुमान के खंडण का कथन एवं परीक्षण करें।

Read more 

1. दर्शनशास्त्र की आवश्यकता



विद्यार्थी जीवन क्या है विद्यार्थी जीवन की कुछ आदतें क्या होनी चाहिए

 आज की इस आर्टिकल में हम पढ़ेंगे विद्यार्थी जीवन की कुछ आदतें और विद्यार्थी जीवन क्या है ? विद्यार्थी जीवन में हमें किन-किन तत्वों पर ध्यान देनी चाहिए जो हमें लक्ष को प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं आज के इस आर्टिकल में कुछ बिंदु नीचे दी गई है जिन्हें ध्यान से पढ़ें हैं और उस पर अमल करें।



नीचे दिए गए इन महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें -


विद्यार्थी जीवन क्या है

विद्यार्थी जीवन एक ऐसा युग है जब व्यक्ति शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का सामना करता है और अपने जीवन को बेहतर बनाने की कड़ी मेहनत करता है। यह जीवनकाल का एक महत्वपूर्ण अध्याय होता है जिसमें व्यक्ति नए ज्ञान, विचार, और अनुभवों को प्राप्त करता है। 

विद्यार्थी जीवन का महत्व 

  1. शिक्षा प्राप्ति:

    • विद्यार्थी जीवन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्राप्ति है। यह उन्नति और स्वयं को समृद्धि की दिशा में बढ़ाने का साधन होता है।
  2. विकास और स्वयं सुधार:

    • विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के व्यक्तिगत और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। यह उसे नए विचार, कौशल, और दृष्टिकोण प्रदान करता है।
  3. सामाजिक अनुभव:

    • विद्यार्थी जीवन में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव होते हैं जो व्यक्ति को समृद्धि और समर्थन में मदद करते हैं।
  4. समर्पण और मेहनत:

    • विद्यार्थी जीवन में समर्पण और मेहनत की आदतें डालना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मजबूती से काम करने में मदद करता है।
  5. योजना बनाना और लक्ष्यों की प्राप्ति:

    • विद्यार्थी जीवन में योजना बनाना और लक्ष्यों की प्राप्ति का अभ्यास करना एक महत्वपूर्ण कौशल है जो व्यक्ति को सफलता की दिशा में मदद करता है।
  6. सामग्री का संबादधन:

    • विद्यार्थी जीवन में व्यक्ति को विद्या सामग्री को संबाधित करने और समझने का अवसर मिलता है।
  7. सहयोगी बनावट बनाए रखना:

    • विद्यार्थी जीवन में सहयोगी बनावट बनाए रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपको सामरिक और आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकता है।

विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण होता है, और इससे उसे अपने भविष्य की दिशा में सही कदम बढ़ाने में मदद मिलती है।


विद्यार्थी जीवन की कुछ महत्वपूर्ण आदतें


नियमित पढ़ाई का समय निर्धारण करें

विद्यार्थी जीवन में हमें समय का ध्यान रखना अति महत्वपूर्ण है हमें निश्चित और नियमित पढ़ाई हमें हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करती है।


स्वास्थ्य का ध्यान रखें

स्वस्थ का ध्यान रखना भी विद्यार्थी की अच्छी आदतों में शामिल होती है शारीरिक स्वस्थ और मानसिक स्वास्थ एक विद्यार्थी की मन मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में सहायता करती है स्वस्थ मस्तिष्क स्वच्छ विचार इससे होगा देश का विकास और स्वयं का विकास। अतः स्वस्थ का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।



स्वस्थ और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें

स्वस्थ और सकारात्मक दृष्टिकोण एक विद्यार्थी को उसकी सोच और कृतित्व को सुधार करने में सहायता करती है और यही सोच उसकी लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होती है। इन आदतों को खुद पर लागू करने के लिए हर सुबह सकारात्मक चीजें पढ़ना और सुना चाहिए।


समय का प्रबंध करें

समय का प्रबंध करना एक विद्यार्थी की आदतें होनी चाहिए इससे विद्यार्थी को अतिरिक्त दूसरे कार्य करने में भी समय आसानी से मिल जाती है समय का प्रबंध बहुत जरूरी है निर्धारित और निश्चित समय पर निश्चित कार्य करनी चाहिए।


स्वतंत्रता और जिम्मेदारी

कोई भी काम एक विद्यार्थी को स्वतंत्रता और ईमानदारी पूर्वक जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करनी चाहिए। इन सभी चीजों को आदत में लाने की कोशिश करनी चाहिए आपकी जिम्मेदारी ही आपकी पहचान होती है।


सामाजिक संबंध बनाए रखें

आप विद्यार्थी जीवन में भी सामाजिक संबंध बनाएं रख सकते हैं आप समाज में किसी प्रकार की समस्या आती है तो आप उसे अपनी शिक्षा के दम पर आप उन समस्याओं को समाधान करने की कोशिश करें इससे सामाजिक संबंध स्थापित होगी।


लक्ष्य निर्धारित करें


अगर आप विद्यार्थी हैं और आपके पास कोई लक्ष्य नहीं है तो आपको लक्ष्य निर्धारित करने की जरूरत है आप एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित करें और उस पर रोज 2 घंटे समय दें।

ऊपर दी गई इस सभी आपको आपकी मंजिल तक ले जाने में सहायता करेगी आप इन बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें और इन्हें अप्लाई करने की कोशिश करें यह आपको रामबाण की तरह आपके जीवन में बदलाव लाएंगे और आपको एक नई पहचान देंगे।



इंस्टाग्राम फेसबुक से बिजनेस स्टार्ट करने के 10 तरीके नीचे दिए गए हैं

 आज की इस आर्टिकल में हम फेसबुक और इंस्टाग्राम से कैसे बिजनेस की स्टार्ट करें कैसे आईडी बनाएं इसके बारे में नीचे आर्टिकल लिखे गए हैं आप वहां से आर्टिकल को पढ़कर आप अपना इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज बनाएं और अपनी बिजनेस को बढ़ाएं।

Useful platform 





यह मैटर नहीं करता कि आप एक विद्यार्थी हो या आप 25 साल के युवा हो आपको जब  जानकारी प्राप्त होगी तभी आप शुरुआत कर सकते हैं।

बिजनेस की शुरुआत करने के लिए Instagram और Facebook पर एक पेज बनाना अच्छा विचार है, क्योंकि इससे आप अपने व्यवसाय को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों पर प्रसारित कर सकते हैं और अधिक ग्राहकों तक पहुँच सकते हैं. निम्नलिखित चरणों का पालन करके आप एक Instagram और Facebook पेज बना सकते हैं:


1. **लॉग-इन या साइन-अप:** Facebook पर पेज बनाने के लिए, सबसे पहले आपको Facebook पर अपना खाता बनाना होगा. आप यहाँ [Facebook](https://www.facebook.com/) पर जाकर एक खाता बना सकते हैं. यदि आपके पास पहले से ही एक खाता है, तो Facebook पर लॉग-इन करें.


2. **पेज बनाएं:** Facebook पर लॉग-इन करने के बाद, आप अपने Facebook प्रोफ़ाइल पर जाएं और वहां "बनाएँ" पर क्लिक करें. इसके बाद "पेज" विकल्प का चयन करें.


3. **पेज के लिए श्रेणी चुनें:** आपके व्यवसाय के प्रकार के आधार पर एक श्रेणी चुनें, जैसे कि "वस्त्र," "रेस्टोरेंट," "कला और मनोरंजन," आदि.


4. **पेज का नाम और विवरण दें:** अपने पेज का नाम चुनें और एक संक्षेपक विवरण दें जो आपके व्यवसाय की विशेषता को दर्शाता है.


5. **प्रोफ़ाइल फोटो और कवर फोटो जोड़ें:** एक प्रोफ़ाइल फोटो (जो आपके व्यवसाय का चित्रित ब्रांडिंग हो सकता है) और एक कवर फोटो जोड़ें.


6. **सेटिंग्स और विशेषता जोड़ें:** पेज की सेटिंग्स को निर्धारित करें और आपके व्यवसाय की विशेषता जैसे कि संपर्क जानकारी, कार्य का समय, आदि जोड़ें.


7. **Instagram पेज संगठन:** आप अपने Facebook पेज को Instagram से जोड़ सकते हैं. इसके लिए, आपको पेज की सेटिंग्स में जाकर "Instagram" सेक्शन में अपने Instagram  को जोड़ें ।

8. यदि आपका कपड़े की बिजनेस है तो आप लगातार कपड़े का पोस्ट डालते रहें और हो सके यदि आपके पास बजट हो तो आप ऐड के रूप में भी अपने इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से अपने कस्टमर तक पहुंच सकते हैं और अपने बिजनेस को आगे बढ़ा सकते हैं।

9. यदि आप एक यूट्यूब हैं तो आप अपने यूट्यूब वीडियो को इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट करें और रेगुलर पोस्ट करें ताकि आपका कस्टमर तक कि आपका viewer लगातार आपकी वीडियो देखें।

10. आप इंस्टाग्राम और फेसबुक में ग्रुप बनाकर अपने ग्रुप में लोगों को जुड़ने के लिए और लोगों को जोड़ने के लिए लिंक शेयर करने के लिए आप कह सकते हैं ऐसा करने से जब आपके इंस्टाग्राम पेज या फेसबुक पेज पर जब 2000-4 000 मेंबर हो जाए तो आप अपना ऑनलाइन वेबसाइट का लिंक शेयर करें और यदि आपका कपड़े की ऑनलाइन बिजनेस है तो आप लिंक प्रोवाइड कर सकते हैं यदि आप एक वीडियो क्रिएटर है तो आप अपने वीडियो वहां शेयर कर सकते हैं और अगर आप एक यूट्यूब हैं तो आप वहां अपना वीडियो शेयर कर सकते हैं साथ ही साथ यदि आप लगातार काम नहीं कर सकते तो आप अपने ग्रुप को रेंट पर दे । इससे आपको अच्छी खासी अर्निंग हो जाएगी।

जब आपके ग्रुप में काफी मेंबर होंगे तो बड़े ग्रुप वाले आपको पैसे की डिमांड करेंगे कि आपकी ग्रुप का हमें मेंबर चाहिए आप उसके लिए उनसे चार्ज ले सकते हैं इससे भी आपकी अच्छी खासी अर्निंग हो जाएगी।



आज की इस आर्टिकल में आपकी सहायता के लिए मैंने आर्टिकल लिखने की कोशिश की है यदि यह आर्टिकल आपको हेल्पफुल लगेगी तो आप कमेंट बॉक्स में लिखना बिल्कुल ना भूले ताकि आने वाली आर्टिकल में इसी तरह में बिजनेस से संबंधित और हेल्प के लिए मैं राइट करने की कोशिश करूंगा।


युवा बेरोजगार की सबसे बड़ी समस्या

 युवा बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है जो विभिन्न कारगरता क्षेत्रों में रोजगार की कमी के कारण होती है। यहां कुछ मुख्य प्रमुख समस्याएं और उनके कारगर समाधानों के बारे में बात की जाएगी:


1. **शिक्षा और प्रशिक्षण की कमी**:

   - *समस्या*: युवाओं में आदेश व्यवस्था में कमी और उच्च गुणवत्ता वाली प्रशिक्षण की कमी होने से रोजगार के लिए उन्हें तैयार नहीं किया जाता।

   - *समाधान*: सरकार को उचित शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए, जो उद्यमिता और कौशलों को बढ़ावा देगा।


2. **रोजगार के अवसरों में कमी**:

   - *समस्या*: अनुपयोगी रोजगार के अवसरों में कमी, विशेषकर विभिन्न क्षेत्रों में नौकरीयों के लिए उचित अवसरों की कमी होना यह समस्या बढ़ाता है।

   - *समाधान*: सरकार को नौकरी बाजार में नई नौकरियों को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे नई उद्योग, उन्नत तकनीकी विकास और नई उपयोगी सेक्टरों में नौकरियों के अवसर।


3. **उद्यमिता के लिए समर्थन की कमी**:

   - *समस्या*: युवा अक्सर उद्यमिता का समर्थन नहीं प्राप्त कर पाते, जो उन्हें नई उद्यमिता शुरू करने में मदद कर सकता है।

   - *समाधान*: सरकार को उद्यमिता प्रोत्साहन के लिए प्रोग्राम और वित्तीय समर्थन प्रदान करने चाहिए।


4. **अनुकूलित नौकरी नियोजन**:

   - *समस्या*: नौकरी नियोजन में अधिक अनुकूलितता की कमी होने के कारण, युवा रोजगार नहीं पा सकते।

   - *समाधान*: सरकार को नौकरी नियोजन की नीतियों में सुधार करना चाहिए ताकि युवा अपने कौशलों और रुचियों के आधार पर अधिक उपयुक्त नौकरियों का चयन कर सकें।


5. **कर्मचारी नहीं बनाने वाली संगठनों की कमी**:

   - *समस्या*: कुछ संगठन युवाओं को कर्मचारी नहीं बनाने के लिए तैयार नहीं करते और इसलिए रोजगार की समस्या बढ़ जाती है।

   - *समाधान*: संगठनों को युवाओं को बेहतर विकास के लिए उचित तरीके से प्रशिक्षित करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।


मुझे आशा है कि आप ऊपर लिखी आर्टिकल को समझ गए होंगे आर्टिकल कैसी लगी आप कमेंट बॉक्स में टाइप करके मुझे बता सकते हैं और अगली नेक्स्ट टॉपिक के लिए आप मुझे सजेस्ट कर सकते हैं।

अच्छी संगति पूरा जीवन बदल सकती है

 कहा जाता है कि आप जिन जैसे लोगों के साथ रहते हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आप कैसे होंगे। संक्षेप में कहें तो जैसा संग वैसा रंग। रूढ़िवादी कल आने लगी इस कहावत में बहुत ही मर्म के साथ सच्चाई बयां की गई है। इस प्रकार चिंतन मनन किया जाए तो यह सीख जीवन की दिशा बदलने वाले में समर्थ है। मित्र हमारी हिमालय के समान विकराल समस्याओं को भी रेत की ढेर जैसे मामूली बना देते हैं। मित्र ऐसे होना चाहिए कि उनके स्मरण मात्र से हमने लक्ष्य प्राप्ति के लिए बल उत्साह का संचार हो जाए यह होगा तभी जब सच्चा संग मिलेगा।


वह अवसर खोजें जो आपके लिए सही हो

जैसे कि आपने शीर्षक को देखकर समझ गया होगा की आज की इस आर्टिकल में हम सफलता की उस फार्मूले के बारे में पढ़ेंगे जोकि एक व्यक्ति को अपने खुद के बारे में पता नहीं होता है आज इस आर्टिकल में खुद की टैलेंट को जानने के लिए कुछ पॉइंट दिए गए हैं जो कि महत्वपूर्ण पॉइंट है

यह एक महत्वपूर्ण बुक हसल : 

 द पावर टू चार्ज योर लाइफ विद मनी ,मीनिंग एंड मोमेंटम, यह पुस्तक हमें प्रेरित करती है अपने उन अवसरों को तलाश करने के लिए जो हमारे यूनिक टैलेंट हो यह पुस्तक का आधार पूरी तरह हमारे टैलेंट के अनुरूप है उन्हें जानने और पहचानने की शिक्षा देते हैं।


success is the best happiness in your life

ए‌‌क एक्शन प्लान बनाएं

सपने देखना अच्छा है लेकिन सपने ही देखते रहने से बात नहीं बनेगी। आपको अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी करना होगा। अंग्रेजी का शब्द है डे ड्रीमिंग। इसके साथ समस्या यह है कि सपने देखने से ही हमें इतना संतोष मिलने लगता है कि हम उन्हें साकार करने की कोशिश नहीं करते। कुछ कीजिए, एक्शन प्लान बनाइए।

सफलता का हुनर

किताब का शीर्षक जिस फसल शब्द पर आधारित है उसका मतलब होता है अपने लक्ष्य के लिए एक सदी की रणनीति से काम करना, फिर भले व अप्रत्यक्ष हो। इसमें हम खुद को ऐसी स्थिति में लेकर आते हैं, जिसमें भाग्य, अवसरों, परिवर्तन या दूसरे के सहयोग से लाभान्वित हो सकते हों। हस्लिंग सफलता के लिए एक जरूरी हुनर है।


एक काम पर फोकस

हमें यह भी याद रखना होता है कि हम एक साथ हर चीज नहीं कर सकेंगे। हमें बहुत सारी संभावनाओं और विकल्पों से चयन करना होता है और अपनी प्राथमिकताएं तय करना होती है। उसी के बाद हम अपनी एक बेहतर योजना बना सकते हैं। किताब गाती है कि जो हम चाहते हैं उसे पाने के लिए हमें नियमित रूप से बीट साइज्ड यानी छोटे-छोटे जोखिम उठाने होंगे।

Amazon prime link 


मिनिमलिस्टिक अप्रोच☝

एटॉमिक हैबिट्स का जमाना है। स्मॉल एज ब्यूटीफुल की बातें कहीं जा रही है। और मिनिमलिस्टिक अप्रोच चलन में आ रही है। यह किताब भी हमें एक फार्मूला देती है। स्मॉल एवरीडे विंस। छोटे कदम उठाने वाला लंबी दूरी तय करता है। जरूरत इस बात की है कि ट्रैक पर बने रहें और एक समय में एक ही लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें।

कामयाबी का फॉर्मूला

सफलता का फार्मूला है सक्सेस= हंसल +लक + यूनिक टैलेंट।

यानी अगर आपको सफलता पाना है तो अपनी ओर से योजनाबद्ध और रणनीतिक प्रयास करें, भागे को अपने पक्ष में मोड़ और अपने यूनिक टैलेंट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। यकीन मानिए आप जो कर सकते हैं वह कोई और नहीं कर सकेगा।

अपना टैलेंट खोजें

यह कितना आश्चर्यजनक है कि हम अपने में से बहुत सारे लोगों को अपने यूनिक टैलेंट के बारे में पता नहीं होता। क्या आपको सचमुच में मालूम है कि आप किस चीज में सबसे अच्छे हैं? वह जो केवल आप कर सकते हैं? अगर आपने अभी तक यह पता नहीं लगाया तो प्रयोग करने से संकोच न करें लर्निंग और एक्सपेरिमेंट भरी जिंदगी सफलता से दूर नहीं रह सकती।

अपनी यूनिकनेस को एडवांटेज बनाएं          

आपको कहीं से तो शुरुआत करना ही है। सफल से सफल व्यक्ति भी जीरो से ही शुरु करता है। तो क्यों ना उस चीज से शुरू करें, जिसे आप पसंद करते हैं और जिसे आप सच्चे से कर सकते हैं? अपने पक्ष में आपका मोमेंटम ही आपके भाग्य का निर्माण करेगा

कुछ मोटिवेशन बुक जो जिंदगी बदल सकती है 

amozon link

1.The Working Class A Story to change your life. 

2. The power of positive atitude .Rode to success.

3.Rise to success: The secret power of Brain to change your life

More...........

अगर आज की आर्टिकल अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट बॉक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए स्वतंत्र हैं आप अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं ताकि आने वाले आर्टिकल में इसी तरह की मोटिवेशन आर्टिकल पोस्ट हमारी टीम द्वारा की जा सके।


More read........

Here are some tips for launching a new product 😊