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प्रायश्चित करने के लिए गांधी जी ने कौन सा रास्ता चुना

 प्रयश्चित करने के लिए गांधी जी ने कौन सा रास्ता चुना?



गांधी जी ने अपने सारे अपराध पिता के सामने स्वीकार करने का निश्चय किया उन्हें यह डर नहीं था कि उनके पिता उन्हें पिटेंगे। क्योंकि उनके पिता ने कभी उन पर हाथ नहीं उठाया था बल्कि उन्हें यह डर था कि वे स्वयं दुखी हो जाएंगे अपना ही सर पीट लेंगे या हो सकता है उन्हें खरी-खोटी भी सुनाई दे परंतु सत्य एवं अहिंसा के पुजारी गांधी जी ने प्रायश्चित करने का निर्णय लिया। गांधीजी ने अपने सारे दोस्त एक पत्र में लिखकर कांपते हाथों से पिता के हाथ में रख दिया। स्वयं अपराध बोध से उन दोस्तों के लिए दंड की मांग की पिता से विनती की मेरे अपराध के लिए स्वयं को दुखी ना करें साथ में यह प्रतिज्ञा भी ली कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं करेंगे। बालक की प्रयश्चित को देखकर उनकी आंखें भर आई। आंखों से मोती के समान आंसू बहने लगे आंसुओं से पत्र भी गया पिता ने पत्र फाड़ कर फेंक दिया और आंखें बंद कर लेट गए आंसू में प्रेम था ।जिससे गांधीजी के सारे दोष धूल गए ।पिता ने उन्हें क्षमा कर दिया उनके लिए यह वास्तविक अहिंसा का पाठ था

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गांधी जी का संक्षिप्त परिचय देते हुए चोरी और प्रेषित के संबंध में गांधी जी के विचार पर प्रकाश डालिए?


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